दिल्ली डिप्टी सीएम सिसोदिया की अनशन तुड़वाने पर ज़ोरदार धमकी

दिल्ली में धरना ड्रामा चरम पर पहुंच चुका है| मुख्यमंत्री केजरीवाल एवं मंत्रिमंडल का एलजी के घर धरने का आज पांचवा दिन है| उनके तीन मंत्रियों ने 6 बजे तक राजनिवास पर धरना दिया तो वहीँ बाकी दो मंत्री – सतेंद्र जैन व मनीष सिसोदिया अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है|

आपको सूचित कर कर दें कि कि अब केजरीवाल व उनके मंत्रियों का धरना समाप्त करने के लिए दबाब देने के लिए राजनिवास में एंबुलेंस और डॉक्टर पहुंचे रहे हैं।

इसके बाद डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर चेतावनी दे डाली है -“मैं और सत्येंद्र जैन दिल्ली की बेहतरी के लिए तपस्या कर रहे हैं, अगर एलजी साहब ज़बरदस्ती अनशन तुड़वाने की कोशिश करेंगे तो हम पानी भी त्याग देंगे।”

राजनिवास पहुंची एम्बुलेंस, डॉक्टरों की टीम और पुलिस आदि के वहां के पहुंचने के बाद आम आदमी पार्टी ने एलजी के ऊपर आरोप मढ़ा है कि उनके द्वारा सीएम व मंत्रियों का धरना बंद करवाए जाने की जबरजस्ती की जा रही है| इस बारे में आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा “जिस तरह से खबर मिल रही है, एलजी हाउस में अफरा तफरी का माहौल है और छावनी में तब्दील कर दिया है।

वहीँ ख़बर सामने आयी कि सीएम केजीरवाल व मंत्रियों के दफ्तर पर धरने की वजह से एलजी अपना सारा काम घर से ही कर रहे है| इसके बाद आम आदमी पार्टी ने पीएमओ का घेराव कर धरना देने का एलान किया है| पार्टी ने यह ऐलान किया है कि वह रविवार को पीएम आवास का घेराव करेगी। उनका कहना है कि उपराज्यपाल उनकी बात ही नहीं सुन रहे हैं, इसलिए अब बात पीएम तक पहुंचने की ज़रुरत है। पार्टी ने बयान में कहा है कि रविवार शाम 5 बजे राशन की होम डिलीवरी के लिए सभी विधायक चावल का एक पैकेट प्रधानमंत्री को पार्सल भेजकर कहेंगे कि दिल्ली के लोगों का राशन मत बंद कीजिए।

सीएम केजरीवाल ने वीडियो ज़ारी कर के कहा है कि अगर रविवार तक कुछ नहीं होता है तो तो दिल्ली के घरो से 10 लाख पत्र जमा किये जायेंगे| उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर भेजा जायेगा और उनसे दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और दिल्ली वासियों को राशन की होम डिलीवरी करने की अनुमति प्रदान करने की मांग करेंगे, माने तो ठीक वरना आंदोलन तेज़ होगा|

इस हाई-वोल्टेज धरने के अंत जो भी हो, केजरीवाल हर बार धरना पॉलिटिक्स के शस्त्र का इस्तेमाल करते है चाहे उनकी 47 दिनों की सरकार हो या अब महाबहुमत वाली सरकार| अंतर बस यह है कि उस वक़्त सड़क पर धरना व सोने से लोगों में उनकी सादगी का संचार हुआ था इसलिए वह दोबारा चुने गए लेकिन अब यह हाईटेक ड्रामेबाज़ी भरा धरना लोगो को कितना रास आएगा, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा। इस धरने पर केंद्र सरकार क्या रुख अख्तियार करती है, यह तो पता चल ही जायेगा किन्तु इस अवस्था में कोई को कदम उठाना ही होगा, क्योंकि जनता को बहुत दिनों तक भुगतने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है|

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