नक्सलियों ने बनाया पीएम मोदी को जान से मारने का षड़यंत्र

हाल में ही भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पांच कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और फिर नजरबंदी के बाद सोशल मीडिया में सरकार समर्थकों और विरोधियों के बीच प्रचार युद्ध शुरू हो गया है। यही नहीं सुरक्षा एजेंसियों में भी इस हिंसा को लेकर बहस छिड़ गई है। और तो और अब यह भी खबर आ रही कि अर्बन नक्सलियों ने  पीएम नरेंद्र मोदी को जान से मारने के लिए बहुत बड़ा षड्यंत्र रचा था, लेकिन गिरफ्तारी के बाद यह सूत्रों से पता चला कि नक्सलियों का यह गेम प्लान एक्सपोज़ हो गया है। और यह सारी खबर मीडिया पर जोरों से आग की तरह फैल रही है।

नक्सलियों ने रचा पीएम नरेंद्र मोदी की हत्या का षड्यंत्र-

भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले में वकील सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वेरनोन गोन्जाल्विस, पी वरवरा राव और अरुण फरेरा को गिरफ्तार किया गया है। इनकी गिरफ्तारी एक पत्र के आधार पर पुणे पुलिस ने की थी। यह पत्र कथित तौर पर दलित एक्टिविस्ट रोना विल्सन के लैपटॉप से बरामद हुआ था जिसमें राजीव गांधी कांड को दोहराने की बात कही गयी थी। वहीं, इसी पत्र में प्रधानमंत्री मोदी को उनके रोड शो के दौरान मारने की बात कही गई थी। अब सबसे बड़ा यह सवाल उठता है कि नरेंद्र मोदी को मारने के लिए यह साजिश रची गई है उसका कोई भी तर्क नहीं निकलता क्योंकि, मोदी को मारना इतना आसान नहीं है। पीएम मोदी जहां भी जाते हैं, उस जगह जमीन से लेकर आसमान तक चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जाती है। हाल ही में पीएम मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा में पैदल चलते नजर आए थे, इस दौरान भले ही भीड़ उन्हें देख पा रही थी लेकिन विशेष प्रशिक्षित एसपीजी कमांडोज की नजरें चप्पे-चप्पे पर थीं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीएम मोदी जब भी अपनी रैली है रोड शो करते हैं तो उनकी सुरक्षा के लिए सभी कमांडोज अपनी नजरें जमाए रहते हैं और किसी भी हालात से लड़ने के लिए बिलकुल तैनात रहते हैं।  पीएम मोदी की रैली शुरू होने से पहले उनके काफिले में चलने वाली कारों की एसपीजी अच्छी तरह जांच करती है। इसमें कई डमी गाड़ियां भी मौजूद रहती हैं। पीएम मोदी के काफिले की एक गाड़ी में जैमर होता है जिसमें दो एंटीना फिट रहते हैं, ये सड़क के दोनों तरफ 100 मीटर की दूरी तक रखे विस्फोटक को निष्क्रिय करने में सक्षम होते हैं। साथ ही किसी भी संदिग्‍ध सिग्‍नल को पीएम के काफ‍िले तक पहुंचने से रोकते हैं।

या सबसे बड़ा सवाल उठता है कि क्या प्रधानमंत्री का सुरक्षा घेरा भेदना इतना आसान है कि नक्सली उन तक पहुंच पाएं ? हम बता दें कि पीएम मोदी तक पहुंचना किसी के लिए भी आसान नहीं है उनके साथ हजारों की तादाद में सिक्योरिटी गार्ड मौजूद रहते हैं और उनकी सुरक्षा का पूरा पूरा निरीक्षण करते हैं।

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram