प्रणब दा की बेटी शर्मिष्ठा ने दिया शिवसेना को एक टूक जवाब , राजनीति ने नहीं होगी पुनः वापसी

पूर्व राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुख़र्जी की बेटी और कांग्रेस की नेता शर्मिष्ठा मुख़र्जी ने शिवसेना के उस बयान को खारिज करते हुए कहा कि उनके पिता अब राजनीति में पुनः वापसी नहीं करेंगे यानी उनकी पॉलिटिक्स में दूसरी पारी नहीं होगी| दरअसल शिवसेना ने कुछ दिन पहले यह बयान ज़ारी कर के सियासी पारे को गरम कर दिया था कि यदि भारतीय जनता पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो वह पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए आगे किया जाएगा| शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने यह बयान देकर नया समीकरण साधने का प्रयास किया था|

राउत के इसी बयान पर पलटवार करते हुए शर्मिष्ठा ने ट्वीट कर के कहा ‘श्रीमान राउत, राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद मेरे पिता फिर दोबारा सक्रीय राजनीति में कदम नहीं रखने जा रहे हैं।’ इससे पहले शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में यह टिप्पणी गुरूवार को प्रणब दा के संबोधन के दो दिन बाद की गई थी जबकि खुद भाजपा-शिवसेना में खींचतान ज़ोरो पर है|

संपादकीय में यह वर्णित है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सलाहकार समिति भविष्य में राजनीति के ऐसे दौरे लाने का काम करेगी जिनमें प्रणब को प्रधानमंत्री बनाने का विकल्प इस्तेमाल करने की भी बात कही गई है| उनके दिमाग में इस ख़ास संभावित कदम को लेकर क्या चल रहा है यह 2019 लोकसभा चुनाव के वक़्त ही साफ़ हो पाएगा| राजनीति की गलियों में यह कयास की लहरें तेज़ हो गई है कि भाजपा को पूर्ण बहुमत न मिलने प्रणब मुख़र्जी को ही एनडीए का सर्वमान्य उम्मीदवार माना जाएगा क्योंकि संघ अब सत्ता को किसी भी हालत में गंवाना नहीं चाहता है|

गौरतलब है कि शर्मिष्ठा मुख़र्जी के कांग्रेस छोड़ भाजपा से चुनाव लड़ने की अटकले तेज़ हो गई थी लेकिन इस बात को उन्होंने सिरे से खारिज करते हुए खुद को प्रो-कांग्रेसी करार दिया| वैसे भी वह हमेशा से बीजेपी के विरोध में देखी जाती है| उन्होंने अपने पिता के आरआरएस के कार्यक्रम जाने को लेकर तो विरोध किया ही और बाद में अपने उस डर के सच होने की बात रखी जब उनके पिता की संघ ध्वज प्राथना करते हुए मॉर्फेड फोटोज इंटरनेट पर ज़ारी की गई जिसको उन्होंने अपने पिता के नाम को लेकर दूषित प्रचार का घटिया तरीका बताया हालांकि संघ द्वारा भी इसकी निंदा की गई और इन फोटोज का खंडन किया गया|

देखते है कि शिवसेना इसका प्रतिउत्तर देती है या फिर यह मामला भी फर्ज़ी राजनैतिक समीकरणों के गप्पेबाजी की तरह साबित होगा|

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