प्रणब दा के आरआरएस कार्यक्रम भाषण के बाद कांग्रेस ने अलापा दूसरा राग

पूर्व राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कार्यक्रम में सम्बोधन के बाद उन्हें इस कार्यक्रम में पहले जाने से रोकने वाली उन्हीं की कांग्रेस पार्टी ने अब दूसरा राग अलापना शुरू कर दिया है| अब जो कि प्रणब दा ने खांटी कांग्रेसी की तरह अपने एकता और देशभक्ति जैसे मौलिक तत्वों की पैरवी की तो कांग्रेसी इसे किसी वैचारिक जीत से कम नहीं मान रहे हैं|

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संघ मुख्यालय जाकर उन्हें सच्चाई कई आइना दिखाया है| कांग्रेस ने मन कि उनके दौरे को लेकर पार्टी की चिंताएं और अटकले थी लेकिन वैसा हुआ नहीं जैसा सोचा गया था|

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि प्रणब दा ने संघ के ही मंच पर उसे भारत की गौरवशाली परंपरा से अवगत कराया है जिसके खिलाफ संघ सदा रहा है| उन्होंने संघ की आँख और आत्मा पर चढ़े मकड़जाल को उतारने का सतत प्रयास किया है| भारत अपनी विविधता और अहिंसा से जीता है न कि असहनशीलता और नफरत से जिसकी वकालत संघ करता है|

सुरजेवाला ने कहा कि प्रणब दा ने मोदी सरकार को उसके राजधर्म की याद दिलाई है जिसे वह 2014 के बाद से ही भूल चुकी है| अब प्रणब मुखर्जी के सम्बोधन के विषय में कांग्रेस पार्टी का डर तो बुरी तरह गायब हो गया है क्योंकि उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ.के बी हेडगेवार को देश का महान सपूत बोलकर उनको श्रद्धांजलि दी लेकिन कहीं भी आरआरएस के हिंदुत्व एजेंडा को छुआ तक नहीं जिससे उसके संघ को आइना दिखाने वाली दलील खोखली जान पड़ती है|  कांग्रेस के लिए बेहतर होगा कि वह अवलोकन कर के कयास लगाए|

वहीँ भाजपा में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पुत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी के शामिल होने और पड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की खबर सामने आयी लेकिन अभी तक इस पर कोई औपचारिक एलान नहीं हुआ है लेकिन प्रणब दा के आगमान से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने आपको वैचारिक छुआछूत से दूर एक बहुयामी संगठन की तरह पेश कर में सफल हुआ है|

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