भारत के प. बंगाल में चुनाव के दौरान हुई बड़े पैमाने पर हिंसा, लोकतंत्र की उड़ाई गयी धज्जिया, कारवाई की कि गई मांग

भारत के पश्चिम बंगाल में हुए पंचायत चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा और मारामारी हुई है। वोटिंग के लिए कड़े सुरक्षा इंतजामों के बाद भी कई इलाकों में जमकर खूनी संघर्ष हुआ। इस चुनावी हिंसा में तकरीबन 12 लोगों के मौत की खबर आयी है। दक्षिण 24 परगना जिले में 3, मुर्शिदाबाद में 2, नदिया जिले में 1 और उत्तर 24 परगना जिले में 1 व्यक्ति की मौत हुई है। नंदीग्रा में भी दो मौत हुई हैं। मरने वालों में CPI(M) कार्यकर्ता, TMC, BJP कार्यकर्ता और एक निर्दलीय उम्मीदवार शामिल है। हालांकि, गृह मंत्रालय ने इन हिंसाओं के संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार से फौरन रिपोर्ट मांगी है।

आपको बता दें कि, मुर्शिदाबाद में एक पोलिंग बूथ पर TMC और BJP कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई है। इसके बाद यहां पोलिंग पेपर को नाले में फेंकने का घिनोना मामला सामने आया है। कूचबिहार में भी BJP कार्यकर्ताओं के हमले में TMC कार्यकर्ता अनीरुल हुसैन को गोली लगने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ये मामला यही नहीं रुका, महिष्कुची में BJP के पोलिंग एजेंट प्रभात अधिकारी पर हमला हुआ हैं वहीं, काकद्वीप के कचारिबारी में उपद्रवियों ने CPM कार्यकर्ता देबू दास को पत्नी समेत जिंदा जला दिया। चुनाव में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किये जाने और पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्यों से 60 हज़ार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किये जाने के बावजूद भी उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, पूर्वी मिदनापुर, बर्दवान, नदिया, मुर्शिदाबाद और दक्षिणी दिनाजपुर जिलों में हिंसक झड़प हुई।

इस हिंसा को लेकर CPM  के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि, ये कुछ नहीं है बल्कि लोकतंत्र का पूरा विनाश है। CPM के वरिष्ठ नेता बिमान बोस ने कहा कि, पूरा चुनाव एक खून-खराबे में तब्दील हो गया क्योंकि किसी भी नियम-कानून का पालन बिल्कुल भी नहीं किया गया। केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने इस प्रकार के भारी हिंसा को देखते हुए पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि, ममता बनर्जी की सरकार ‘बेशर्म’ सरकार है। वो लोकतंत्र एवं लोकशाही में यकीन नहीं रखती। कांग्रेस पार्टी ने भी पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान हुई हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि, चुनाव में हिंसा का होना निंदनीय है और लोकतंत्र में इसकी कोई जगह नहीं है, साथ ही कहा, चुनाव आयोग से ये अपेक्षा है की, चुनाव आयोग 48 घंटे में जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे, फिर चाहे वो किसी भी पार्टी का कार्यकर्ता हो।

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