मगहर में जनसभा संबोधन के दौरान, नरेंद्र मोदी ने सपा-बसपा और कांग्रेस पर साधा निशाना

कहते हैं राजनीति में अगर आपको अच्छी खासी पैठ बनानी है तो आप हर मौके पर राजनीति करना सीख जाइए कुछ ऐसा ही कारनामा अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हुए दिखाई पड़ते हैं। मगहर में कबीरदास जी का 620वां प्रकाट्य उत्सव मनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उत्तर प्रदेश सुबे के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मगहर में उपस्थित हुए। उसके बाद नरेंद्र मोदी ने मौके का फायदा उठाते हुए गठबंधन पर जमकर निशाना साधा।

पहला निशाना आपातकाल पर – 

संत कबीर अकादमी की नींव रखने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कल जो लोग आपातकाल का विरोध कर रहे थे, वही लोग आज आपातकाल लगाने वालों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने आगे भी कहा कि यह राजनीतिक दल शांति या विकास को नहीं अपनाना चाहते, बल्कि यह केवल अशांति ही चाहते हैं।

बसपा सपा गठबंधन को बताया सत्ता के लालची – 

यूं तो गठबंधन पर जमकर ताने-बाने बुने जा रहे हैं लेकिन नरेंद्र मोदी ने बसपा सपा गठबंधन को अपने अनुसार आड़े हाथों लिया। मोदी ने कहा कि समाजवाद और बहुजन की बात करने वाले लोगों को आज हम सत्ता का लालच करते हुए देख रहे हैं। अभी दो दिन पहले ही आपातकाल को 45  साल हुए हैं। सत्ता के लालची ऐसे हैं जो आपातकाल का कभी विरोध किया करते थे तो आज आपातकाल लगाने वालों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कुर्सी झपटने की फिराक में है। मोदी ने कहा है कि वह देश और समाज के बारे में नहीं सोचते बल्कि वे अपने परिवार और समाज कल्याण के बारे में सोचते हैं। मोदी ने अखिलेश के बंगले वाले प्रकरण को तंज भरे अल्फाजों में घसीटते हुए कहा कि ये वो लोग हैं, जो गरीबों, पिछड़ों, दलितों, वंचितों को धोखा देकर अपने बंगले बनाते हैं। ऐसे लोगों से, उत्तर प्रदेश के लोगों को, सावधान रहने की जरूरत है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के बसपा और सपा को निशाना बनाने के पीछे का कारण, बसपा और सपा के गठबंधन से, उत्तर प्रदेश की फूलपुर और गोरखपुर से मिली करारी शिकस्त का मसला है। जबकि फूलपुर डिप्टी सीएम केशव मौर्य का क्षेत्र पड़ता था और गोरखपुर सीएम योगी आदित्यनाथ का लेकिन फिर भी सपा और बसपा के गठबंधन ने बीजेपी को बुरी तरीके से हरा दिया। वहीं कैराना सीट पर भी भाजपा को बुरी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके चलते बसपा और सपा का गठबंधन भाजपा के आंखों का कांटा बनकर बैठा हुआ है, नरेंद्र मोदी मौका पाते ही इस गठबंधन पर टूट पड़ते हैं।

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