मध्य प्रदेश चुनाव से पहले कांग्रेस ने बीजेपी पर यह खतरनाक आरोप लगाया

मध्य प्रदेश में जल्द विधानसभा चुनाव होने है जहाँ 15 साल से भी अधिक समय से सत्ता पर काबिज़ भाजपा की शिवराज सिंह सरकार अपने किले को बनाये रखने की चेष्टा करेगी वहीँ कांग्रेस ने नई टीम के साथ कर्नाटक के बाद अब मध्य प्रदेश जीत लेने का संकल्प ले लिया है|

अपने आक्रामक कैंपेन के तहत कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ राज्य चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटाया है| रविवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई में प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाक़ात की और प्रदेश में 60 लाख फ़र्ज़ी मतदाता होने की बात कही| इसके तुरंत बाद ही चुनाव आयोग ने दो जाँच टीमों का गठन कर मतदाता सूचियों की जाँच के आदेश दे दिए| चुनाव आयोग की टीम खामियों की जांच हेतु नरेला , भोजपुर ,सिवनी ,मालवा और होशंगाबाद जिलों का दौरा करेगी|

कांग्रेस की यह मांग है कि जिन अधिकारीयों ने 1 जनवरी 2018 को मतदाता सूची प्रकाशित की थी उनके खिलाफ भी सख्त कार्यवाई की जाए | एक ही व्यक्ति का नाम एक बूथ पर कई बार,  अलग-अलग क्षेत्रों में शामिल हैं। पार्टी का आरोप है यह गलती से नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया है यानी उसका आरोप है सत्ता पक्षी भाजपा पर |

प्रतिनिधि ने मुलाक़ात कर के आयोग को एक ज्ञापन सौंपा जिसके साथ उसने फ़र्ज़ी मतदाताओं की सूची भी पेश की | बाद में पार्टी दफ्तर में हुई प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि यह मामला बेहद संगीन है इसलिए रविवार को ही इस मामले को लेकर आयोग से मिलने का समय लिया गया था | उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में 60 लाख नकली मतदाता बनाये गए हैं , मतदाताओं की वृद्धि दर तो 40 फीसदी है परन्तु प्रदेश की जनसँख्या तो 24 प्रतिशत की दर से बढ़ी है |

चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मुंगावली और कोलारस उपचुनाव में फर्ज़ी मतदाताओं का मामला सामने आने आने के बाद पार्टी द्वारा 91 क्षेत्रों की जाँच की गयी तो वहां 55 ऐसे मतदाता मिले जिनके नाम कई बार लिखे थे जिसका अर्थ साफ़ हुआ कि 40 फीसदी सीट पर केवल अकेले 27 लाख फर्ज़ी मतदाता है |

कांग्रेस के दावे को सही माने और पूरा आंकलन करे तो पूरे  मध्य प्रदेश की जनसँख्या 5 करोड़ है तो उस हिसाब से करीब 12 फीसदी वोटर फर्ज़ी है | सिंध्या की एक और बात में दम दिखाई देता है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस-भाजपा के बीच केवल 9 प्रतिशत का अंतर था जो हुए पूरे 35 लाख लोग इसलिए प्रथम दृश्या में यह कोई गलती नहीं बल्कि एक घोटाला नज़र आता है |

कांग्रेस की मांग तो वाजिब है और उस पर तुरंत करवाई करते हुए चुनाव आयोग की गंभीरता भी नज़र आती है लेकिन सत्ता में बैठी भाजपा की तरफ से अपने ऊपर हुए इस अप्रत्यक्ष वार पर कोई प्रतिउत्तर नहीं आया है , शायद वह सोच समझकर इसका जवाब दे वरना कोई उलटी बात निकल तो मुसीबत उसके लिए ही है पर हाँ भाजपा वाले बोलेंगे ज़रूर क्योंकि मौन व्रत चुनावी समर में हानिकारक ही होवे से !

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