महागठबंधन को लेकर शरद पवार व शरद यादव ने बयानों द्वारा तस्वीर की पहली परत साफ की

लोकसभा 2019 चुनाव के मद्देनज़र विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन धीमे -धीमे एक सूत्र में बंध रहा है और रोज़ जिस तरह नेताओं के बयान सामने आ रहे उससे उनकी एकता , रणनीति की झलक देखने को मिल रही है और इसका ताज़ा उदाहरण दिल्ली के जंतर-मंतर पर देखने को मिला था जब साड़ी पार्टियां राजद के मुजफ्फरपुर कांड के विरोध में बुलाये धरने में शामिल हुई थी| फिर क्या लेफ्ट क्या ममता ? क्या सपा क्या बसपा सभी एक साथ हो लिए क्योंकि मकसद साफ़ है मोदी को हटाना है जिसके लिए कोई भी कीमत को चुकाना है|

बिहार में जेडीयू को सत्ता दिलवाने में अहम भूमिका दिलवाने वाले शरद यादव मोदी के साथ जाने पर नीतीश से अलग हुए थे और खुद लोकतान्त्रिक जनता दल का गठन किया था| आज महागठबंधन की तस्वीर को साफ़ करने में पहला कदम देते हुए उन्होंने इस अहम सफल पर साफ़-साफ़ कह डाला कि क्योंकि कांग्रेस देश में अभी भी सबसे बड़ा विपक्षी दल है इसलिए इसलिए क्षत्रपों के साथ मिलकर ही यह महागठबंधन बनेगा जिसमें वह “ड्राइविंग सीट” में रहेगी| हालाँकि एच डी देवेगौड़ा द्वारा प्रस्तावित “महिला पीएम” कार्ड में मायावती व ममता का नाम अपनी जगह रखने पर शरद बाबू पशोपेश में नज़र आये और इसे टाल गए|

आज ही एक और अहम बयान दिया महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने| उन्होंने साफ़ कहा कि यूनाइटेड प्रोग्रेसिव एलाइंस (यूपीए) अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और मुझे प्रधानमंत्री बनने की कोई महत्वाकांक्षा नहीं है। 2019  के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए हम तीनों नेताओं को देश के भर के विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश करनी होगी|

उन्होंने देश की जगह राज्यों में ही पार्टियों के गठबंधन की वकालत की और इसी के अंतरगर्त मायावती की बसपा को महाराष्ट्र के गठबंधन में शामिल करने का खुला न्योता दिया है जिसका सीधा कारण है मोदी सरकार की दलित विरोधी छवि को भुनाने के लिए मायावती को दलित पीएम उम्मीदवार के रूप में आगे करना|

दो बातें साफ़ हो चुकी है कि कांग्रेस गठबंधन की केंद्र में रहेगी क्योंकि उसके काडर के बिना चुनाव प्रबंधन संभव बिलकुल नहीं है और साथ ही ज़रुरत पड़ने पर पीएम पद हेतु बसपा सुप्रीमो मायावती को आगे करना जिसका साफ़ इंडिकेटर है उनके कद और महत्व में अचानक हुई उछाल और  भले ही उन्हें एक भी सीट न मिली हो परन्तु वोट के हिसाब से वह देश की नंबर 3 पार्टी बनकर उभरी थी| अब देखना रोचक होगा कि आगे तस्वीर की पार्टी कब तक साफ़ होंगी|

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