मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महिला और बाल विकास मंत्रालय को लगाई फटकार

बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में बच्चों के साथ हुए यौन शोषण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चाइल्ड प्रोडक्शन पॉलिसी बनाने के लिए कहा है कोर्ट ने इस केस के बारे में कहा कि हम इस बात से चिंतित हैं कि, शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों का शोषण तो नहीं हो रहा है। कोर्ट ने पूछा है कि पॉक्सो संबंधी केसों में राज्यों में कितने फीसदी मामलों में सजा हुई है। टाटा इंटरव्यू आईएफ सोशल साइंस ने बताया कि पॉक्सो के 1575 केस हुए हैं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसी नीति बनाने की जरूरत है जिससे अपराध को रोका जा सके।

बिहार सरकार ने पेश की अपनी दलील-

जब कोर्ट में मुजफ्फरपुर शेल्टर होम से संबंधित जांच रिपोर्ट को शेयर करने के मामले में बिहार सरकार से पूछा तो, बिहार सरकार ने अपनी दलील पेश की। बिहार सरकार ने शेल्टर होम की सुनवाई के दौरान कहा कि  रिपोर्ट मीडिया में किसी गलत तरह से फैल सकती थी, इसलिए रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे गुनहगारों के सतर्क होने की आशंका भी है। इसीलिए जांच की रिपोर्ट शेयर करना हमारे लिए संभव नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा कि सभी एजेंसियों का एक साथ काम करना संभव है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय को लगाई फटकार-

सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने बच्चों के लिए क्या किया है, जो बच्चे यौन उत्पीड़न के शिकार हुए उनके लिए आपने क्या कदम उठाए ? इस मामले में मंत्रालय ने कहा था कि हमने एक साल पहले राज्य सरकार को रिपोर्ट दी थी। इस बात पर सुप्रीम कोर्ट ने सीधे फटकार लगाते हुए कहा कि इस रिपोर्ट का आपने क्या किया? क्या राज्य सरकार ने उसका पालन किया? अगर ऐसी रिपोर्ट है तो, उसके बाद भी सरकार ने काम नहीं किया तो ये उनकी लापरवाही को दर्शाता है. सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय को फटकार लगाते हुए कहा कि आप क्या डील कर रहे हैं और हलफनामा आपने क्या दाखिल किया है?

अब मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि जब एडवायजरी का पालन नहीं होता तो आप इसे जारी क्यों करते हैं। आपको बता दें कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बच्चियों से हुए यौनशोषण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था और इस बारे में केंद्र सरकार और राज्य सरकार से जवाब तलब किया था।

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