मोदी ने की राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की जमकर तारीफ

राज्यसभा के उपमंत्री चुनाव में एनडीएन कैंडिडेट हरिवंश ने जीत हासिल कर ली है। उपमंत्री  हरिवंश को जीत की बधाई देते हुए नरेंद्र मोदी ने उनकी तारीफों के पुल बांध दिए। नरेंद्र मोदी ने हरिवंश की तारीफ करते हुए कहा कि हरिवंश बलिया से हैं, और 20 साल पहले जब परमवीर अल्बर्ट एक्का देश के लिए शहीद हो गए थे। तब अखबार में खबर आई कि उनकी पत्नी बेहाल जिंदगी जी रही हैं, तो हरिवंश जी ने चार लाख रुपए इकट्ठा किए और शहीद की पत्नी को पहुंचाए। ये बीस साल पहली बात है। मोदी ने आगे कहा कि हरिवंश को पहले से ही पता था कि चंद्रशेखर इस्तीफा देने वाले हैं लेकिन उन्होंने यह खबर पत्रकारों को अखबार में छपने के लिए नहीं दी और अपने पद की गरिमा बरकरार रखी। हरिवंश की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हरिवंश ने अपनी एक अलग पहचान खुद से बनाई है और वह कलम के धनी हैं। पीएम ने आगे कहा कि अब सबको ‘हरि’  की कृपा करनी चाहिए और अब सब कुछ ‘हरि’ भरोसे होगा।

हरिवंश सिंह के बारे में-

हरिवंश सिंह का पूरा नाम हरिवंश नारायण सिंह है। उनका जन्म 30 जून 1956 को बलिया जिले के सिताबदियारा गांव में हुआ था और वाराणसी में उनकी पढ़ाई हुई। हरिवंश जेपी आंदोलन से खासे प्रभावित रहे हैं। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पत्रकारिता में डिप्लोमा की पढ़ाई की और अपने कैरियर की शुरुआत टाइम्स समूह से की। इसके बाद उन्होंने साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग की जिम्मेदारी सौंपी गई।  हरिवंश साल 1981 तक धर्मयुग के उपसंपादक रहे। फिर उन्होंने पत्रकारिता छोड़ दी और  साल 1981 से 1984 तक हैदराबाद और पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की। साल 1984 में एक बार फिर हरिवंश ने पत्रकारिता में वापसी की और साल 1989 तक आनंद बाजार पत्रिका की सप्ताहिक पत्रिका रविवार में सहायक संपादक रहे।

हरिवंश सिंह बने उपसभापति- 

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव में सत्ताधरी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने उम्मीदवार के जीत के साथ ही एक बार फिर विपक्षी एकता को खंडित किया है। नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह को 125 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार बीके हरिप्रसाद को महज़ 105 मत ही मिले। इस तरह एडीएन ने यूपीए के उम्मीदवार को 25 मतों से हरा हरा दिया। राज्यसभा में इस वक्त 244 सांसद हैं, लेकिन  230 सांसदों ने ही वोटिंग में हिस्सा लिया और एनडीए के उम्मीदवार को बहुमत के आंकड़े 115 से 20 वोट ज्यादा मिले है। वहीं 1977 से लगातार कांग्रेस का उम्मीदवार ही उपसभापति बनता था, इस लिहाज से एनडीए की ये जीत बेहद अहम मानी जारी है। हरिवंश की इस जीत में सबसे बड़ा योगदान बीजेडी का रहा जिसने तमाम मतभेदों को बावजूद एनडीए के उम्मीदवार को वोट किया।

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