मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बारे में समझिये यह 5 अहम बातें

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पिछले चार वर्षों में पहली बार, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को आज शुक्रवार को भरोसे का पात्र बनने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेगा। मानसून सत्र के पहले दिन अध्यक्षा सुमित्रा महाजन ने टीडीपी और विपक्ष की और से लाये अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उसे स्वीकार कर लिया। बुधवार को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन लोकसभा सभापति सुमित्रा महाजन ने आंध्र प्रदेश को विशेष स्थिति देने, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जातियों के लिए कमजोर कानून जारी करने के मुद्दे पर नोटिस स्वीकार को कर लिया।

अब इस सियस उबाल के बीच कल तय हो जायेगा कि कौन लोक सभा के लिए एजेंडा सेट करने में कामयाब होता है भाजपा वाली एनडीए या फिर कांग्रेस वाली यूपीए सहित या फिर दोनों से अलग तीसरे मोर्चे वाला विपक्ष नया विकल्प बनकर सामने आता है भले ही कांग्रेस लीड करे या पीछे से ताली बजाये| कल यदि समाचार चैनल या लोक सभा टीवी के सीधे प्रसारण से आप अविश्वास प्रस्ताव को देखें तो इन 5 बातों को ज़रूर समझ लें –

1) टीडीपी के केसिनेनी श्रीनिवास लोकसभा में शुक्रवार सुबह अविश्वास प्रस्ताव का पेश करेंगे

2) राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 533 सदस्यीय लोकसभा में 312 सदस्य हैं, जो 266 के आधे से अधिक हैं। विश्वास प्रस्ताव की चुनौती को पार पाने में उसी कोई दिक्कत दिखाई नहीं दे रही है|

3) सभी विपक्षी पार्टियां अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर रही हैं। एआईएडीएमके और तेलंगाना राष्ट्र समिति ने साफ संकेत दिया है कि वह अविश्वास प्रस्ताव में नहीं रहेगा यानी सरकार को उनकी गैरमौजूदगी से लाभ ही होना ही तो वहीँ कांग्रेस वाले विपक्षी में नुक्सान की बंसी बजनी तय है|

4)शिवसेना ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अपनी तक अपनी स्थिति साफ नहीं की है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से शिवसेना का रुख सरकार के प्रति काफी तल्ख रहे हैं लेकिन वैचारिक आधार पर और राज्य में सत्ता बचाये रखने के लिए वह या तो उपस्तिथित ही नहीं होगा या फिर एनडीए को वोट देगा|

5)शुक्रवार को होने वाली चार्चा के लिए भाजपा को तीन घंटे और 33 मिनट का समय दिया गया है, जबकि कांग्रेस में 38 मिनट, एआईएडीएमके को 29 मिनट, टीएमसी को 27 मिनट, बीजेडी को 15 मिनट, शिवसेना को 14 मिनट, टीडीपी को 13 मिनट और टीआरएस को नौ मिनट का समय दिया जाएगा।

तो देखना होगा कि सोनिया गाँधी का घमंडी “तुक्का” सही साबित होता है या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से एक शांतिमय मास्टरस्ट्रोक लगाकर अपने आपको जनता में सर्वमान्य स्थापित करते हुए 2019 चुनाव की तैयारी करते है| तो इंतज़ार करिये क्योंकि कल शाम ख़ास है आर-पार की लड़ाई होने जो तय है !

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