रातों रात कैबिनेट में फेरबदल हुआ, जानिए क्यों गवाना पड़ा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को सूचना और प्रसारण मंत्रालय

मोदी सरकार में रातों रात कैबिनेट फेरबदल हुआ, जिसके चलते केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को सूचना और प्रसारण मंत्रालय गवाना पड़ा। इसके साथ ही सरकार ने सूचना एवं प्रसारण के राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को स्वतंत्र प्रभार देकर उन्हें इस मंत्रालय की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी है। रेल मंत्री पीयूष गोयल को भी वित्त मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली की स्वास्थ्य होने तक गोयल वित्त मंत्री रहेंगे। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय में राज्य मंत्री का प्रभार संभाल रहे एसएस अहलूवालिया को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री का प्रभार सौंपा गया है।

अब स्मृति ईरानी सिर्फ कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगी, इससे पहले भी उनको मानव संसाधन विकास मंत्रालय से हटा दिया गया था और प्रकाश जावड़ेकर ने उनकी जगह ली थी। हालांकि, जब मानव संसाधन मंत्रालय से हटाया गया था, तो इसे एक चेतावनी माना गया था कि, वो अपने काम करने का तरीका बदलें।

सूचना और प्रसारण मंत्री रहते वक़्त स्मृती ईरानी हमेशा से ही विवादों में रही, उन्होंने फेक न्यूज़ को लेकर एक बयान जारी कर कहा था कि, अगर कोई पत्रकार फेक खबरें करता हुआ या इनका दुष्प्रचार करते हुए पाया जाता है, तो उसकी मान्यता पहली बार 6 महीनों के लिए उसकी मान्यता निलंबित की जाएगी। जबकि दूसरी बार ऐसा करते पाए जाने पर उसकी मान्यता 1 साल के लिए निलंबित की जाएगी। वहीं तीसरी बार अगर इसका उल्लंघन होता है तो पत्रकार की मान्यता स्थायी रूप से रद्द कर दी जाएगी। इस फैसले से स्मृति ईरानी पर सवाल खड़े होने लगे थे साथ ही और कई विवादों के बीच फंसी हुई स्मृति ईरानी पर दो अलग चुनावी शपथपत्र में अपनी शिक्षा के बारे में अलग-अलग जानकारी देने के आरोप लगे है, साथ ही अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर विरोध जताकर स्मृती ईरानी का मंत्रालय विवादों में आ चुका है, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी को लेकर भी स्मृति के मंत्रालय की प्रतिमा गिर चुकी है।

2014 में जब स्मृति ईरानी ने केंद्रीय मंत्री पद की शपथ ली, तो वे मोदी कैबिनेट में सबसे युवा मंत्री थीं। लेकिन शायद विवादों के चलते ईरानी पीएम की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। हालांकि, एचआरडी मिनिस्ट्री छिन जाने के बाद उनमे काफी बदलाव देखने को मिला था। उन्होंने विवादित बयानों से दूरी बना ली और अपना ध्यान कपड़ा मंत्री के तौर पर ही आगे बढ़ाया। इसके बाद उन्हें सूचना प्रसारण मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया था।

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