राष्ट्रपति बनते ही, राष्ट्रपति ने आधी कर दी खुद की ही सैलरी

New president of mexico
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आपने अक्सर ऐसे किस्से सुने होंगे कि राजनेताओं ने अपने लिए मिलने वाली सुख सुविधाओं को लेकर चिंता जाहिर की या फिर यह कहकर नाराजगी जताई कि उन्हें उपयुक्त सुख सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। लेकिन भारत के अलावा कुछ ऐसे भी देश हैं जहां के राजनेता अपना सूटकेस तक खुद से उठाना पसंद करते हैं, और यही नहीं वह खुद को मिलने वाली सुख सुविधाओं से दूर रहना ही पसंद करते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है एक राष्ट्रपति के साथ जिन्होंने खुद को मिलने वाली सैलरी में ही कटौती कर दी है।

मेक्सिको के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने घटाई अपनी सैलरी – 

मैक्सिको के नव निर्वाचित राष्ट्रपति आंद्रेस मैनुअल लोपेज ओबराडोर ने घोषणा की है कि वह अपनी मिलने वाली सैलरी का आधा हिस्सा कम कर देंगे यानी कि उन्होंने अपनी सैलरी आधी कर दी है। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा है कि मैं अब प्रतिमाह 108,000 Pesos Pesos( मैक्सिकन मुद्रा) कमाएंगे। उन्होंने कहा कि वह अपनी सैलरी का आधा हिस्सा इसलिए कम कर रहे हैं ताकि उनकी सैलरी का आधा हिस्सा जनता की भलाई के काम आ सके वही नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के द्वारा की गई घोषणा की तारीफ भी की जा रही है।

भ्रष्टाचारियों को भी नहीं बख्शेंगे राष्ट्रपति – 

राष्ट्रपति ने अपनी सैलरी तो आधी खरीदी है लेकिन उन्होंने उन नेताओं पर भी नकेल कसने के लिए नया नियम तैयार कर रहे हैं जिसके तहत सभी नेताओं को अपनी संपत्ति का ब्यौरा देना पड़ेगा और अगर किसी भी तरीके के भ्रष्टाचार के माध्यम से पैसे कमाए होंगे तो नहीं किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। 57 वर्षीय़ एडमिनिट्रेटिव एसिसटेंट जोसेफिना का कहना है कि सरकारी अधिकीरियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा देना होगा।

गौरतलब है कि मेक्सिको में हाल ही में चुनाव हुए थे जिसमें नेशनल रिजनरेशन मूवमेंट पार्टी के वामपंथू उम्मीदवार आंद्रेस मैनुअल लोपेज ओबराडोर ने 53 फ़ीसदी मतों के साथ जीत हासिल की। जिसके बाद उन्होंने कहा था कि “मैं उन लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करता हूं जिन्होेंने अन्य उम्मीदवारों और दलों के लिए वोट दिया था और विभिन्न संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के लिए भी…जिससे आज हमारी जीत हुई है।” ऐसी घोषणा से, आज हमारे भारत देश को सीख लेने की जरूरत है। क्योंकि हाल ही में भारत में कर्नाटक राज्य के एक नेता ने कहा था कि “वह Innova गाड़ी में नहीं बैठेंगे क्योंकि वह बहुत छोटी है और लोग उन्हें देखेंगे भी नहीं।” ऐसी मानसिकता से हमारे भारत देश को उबरने क आवश्यकता है ताकि समाज कल्याण संभव हो सके।”

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