विपक्ष 8 नवंबर को करेगा पूरे देश में विरोध प्रदर्शन, काले दिन के रूप में समीक्षा करेगा

आज मंगलवार को विपक्षी दलों ने घोषणा किया है कि वे सरकार के भ्रष्ट निर्णय नोटबंदी के एक साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 8 नवंबर को ‘ब्लैक डे’ के रूप में पूरे देश में एक जुट होकर मनाएंगे और सामूहिक विरोध प्रदर्शन करते हुए देश पर थोपे गए इस फैसले का अर्थव्यवस्था पर पड़े नकारात्मक प्रभाव से जनता को रूबरू कराएंगे।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं को बताया  कि विपक्षी पार्टियों ने एक संयुक्त रणनीति तैयार की है और 8 नवंबर, 2016 को लागू नोटबंदी इस शताब्दी का घोटाला है, यही वजह है कि हम सभी इसे काला-दिवस के रूप में मनाएंगे। उन्होंने कहा कि नोटबंदी भाजपा का जल्दबाजी में लिया फैसला और इस फैसले में दूरदर्शिता की कमी दर्शाती है।

“आधुनिक भारत का इतिहास इस ‘स्कैम’ को याद रखेगा जो पिछले साल 8 नवंबर को हुआ था। हमने सरकार की नीति पर कई सवाल उठाए थे, लेकिन सरकार हमारे उठाये सवालों के जवाब नहीं दे सकी और ना ही संदेहों को मिटा सकी थी।”

विपक्षी पार्टियों की समन्वय समिति ने कल संसद भवन में मुलाकात की थी, जहां उसने आजाद को अन्य पार्टियों से बात करने और 8 नवंबर को विरोध योजना को अंतिम रूप देने के लिए अधिकृत किया था।

इस विपक्षी समूह में 18 विभिन्न दल है तथा सरकार के खिलाफ एकजुट है, और एक सात सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया गया है जिसमे कांग्रेस, टीएमसी, सपा, बसपा, द्रमुक, वामपंथी और जदयू को छोड़ चुके या निस्कषित किये जा चुके सदस्य है

पूरे घटनाक्रम में रोचक बात ये होगी कि विपक्ष अपनी इस घोषणा को कितनी प्रभावी ढंग से कार्यान्वित कर पाती है। ये आयोजन एक प्रकार से विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन होगा, जो आगे चलकर उनके सामंजस्य को निखरेगा या बिखेरेगा। जहां एक ओर सरकार नोटबंदी को ऐतिहासिक फैसला और उसके परिणाम को अभूतपूर्व बतलाता है वही विपक्ष के लिए चुनती होगी को वो कैसे आम-जन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कर पाता है।

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