विहिप ने अपने ही पूर्व प्रमुख तोगड़िया के बनाये अहिप को बताया नकली

विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि प्रवीण तोगड़िया का नया संगठन अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद प्रतिद्वंद्विता और नकलीपन पर आधारित है। वीएचपी ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर की सुनवाई को धीमा रखता है तो सभी विकल्प उनके लिए खुले हैं। साथ ही, वीएचपी ने यह स्पष्ट कर दिया कि राम मंदिर के बगल में मस्जिद बनाये जाना उन्हें स्वीकार्य नहीं है।

सोमवार को दिल्ली में वीएचपी की केंद्रीय प्रबंधन समिति की बैठक में राम मंदिर, गोरक्षा  और संवर्धन मंत्रालय और रोहिंग्या घुसपैठ के मुद्दों पर चर्चा हुई। वीएचपी ने कहा कि गाय वध और गोवंश की तस्करी पर बनाये गए कानून का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। बैठक में, संकल्प पारित किया गया था कि गोरक्षक संवर्धन मंत्रालय बनाये जाने की आवश्यकता है|

वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने  पुराने दोस्त प्रवीण तोगडिया द्वारा बनाए गए अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के प्रति विद्वेष, अपनी महत्वाकांक्षा और नकल के आधार पर जो संगठन बनते हैं, वे ज्यादा दूर तक नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद सामूहिक नेतृत्व पर काम करने में भरोसा करता है और एएचपी के आने से से विश्व हिंदू परिषद को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचेगा। वहीं उन्होंने तोगड़िया की घर वापसी के सवाल पर आलोक कुमार ने कहा कि हमारे दरवाजे हमेशा से खुले रहे हैं, आना उनके हाथ में है।

विहिप से लड़ने हेतु प्रवीण तोगड़िया ने बनाई “अहिप”

राम मंदिर पर विहिप का ताज़ा रुख 

राम मंदिर के निर्माण के सवाल पर आलोक कुमार ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रतीक्षा करेंगे लेकिन कानूनी रूप से इसके बगल में एक मस्जिद के निर्माण का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट की आंखों में भूमि विवाद का मामला है और अयोध्या की सांस्कृतिक सीमाओं के भीतर वह कोई भी मस्जिद बनने नहीं देंगे लेकिन कोई इससे बहार मुस्लिम समुदाय मस्जिद बनाये तो उन्हें उससे आपत्ति नहीं है|

फैसला देरी से आने पर विहिप क्या रणनीति अपनाएगी इस पर अलोक कुमार ने कहा कि हमने वकीलों से बात की है और उनका कहना है कि जुलाई से चल रहे इस मामले में अभी तक सारे पहलू हमारे ही पक्ष में है इसलिए साल के अंत तक फैसले आने की उम्मीद है जिसमे हम विजय प्राप्त करेंगे| यदि देरी हुई तो हम अपने साधु-संतो की शरण में जायेंगे और फिर जो भी धर्म संसद का फैसला होगा उसी के अनुसार आगे रणनीति बनेगी|

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