सिटीजन चार्टर लागू करने की भारतीय मतदाता संगठन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने किया इंकार

नागरिक घोषणा पत्र यानी सिटीजन चार्टर जनसेवा उनसे संबंधित विभागों के लिए किए जाते हैं। हाल में ही देशभर में विभिन्न सेवाओं के लिए सिटीजन चार्टर लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट भारतीय मतदाता संगठन द्वारा दाखिल याचिका की सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई इनकार करते हुए साफ साफ शब्दों में कहा कि संसद को इसे लागू करने के निर्देश नहीं दे सकते है। और साथ ही कोर्ट ने  आगे कहा कि याचिकाकर्ताओं को इस मामले को सरकार के पास ले जाने के लिए भी कहा।

भारतीय मतदाता संगठन द्वारा की गई याचिका-

भारतीय मतदाता संगठन ने अपनी इस याचिका में इस बात का जिक्र किया है की, सेवाओं के समय बद्ध निपटारे का अधिकार संविधान की धारा 21 के अनुरूप नहीं है। वही कार्यकर्ताओं का कहना है कि वक्त पर सेवाएं मिलना देश के हर नागरिक का जीने के अधिकार के तहत मौलिक अधिकार है।  इसलिए हर सेवा के लिए वक्त सीमा निर्धारित होना आवश्यक है।

बाद में, संगठन ने कोर्ट में याचिका दाखिल करके कहा था कि जिस समय अन्ना हजारे का आंदोलन चल रहा था, उस समय संसद के केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त नियुक्त करने और नागरिकों को सेवाएं देने के लिए सिटीजन चार्टर लागू करने का फैसला किया था, लेकिन बाद में इसे नहीं लागू किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने दिशा निर्देश जारी करने की भी मांग की थी।

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