4 साल में 14 बार हुई हैं मोदी-जिनपिंग की भेंट, क्या है इस याराना के पीछे का राजनीतिक अर्थ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय-वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। मोदी जी ने इस भेंट के बारे में कहा कि, वुहान में उनके बीच अनौपचारिक वार्ता के बाद हुई यह मुलाकात भारत-चीन मित्रता को और मजबूती देगी। इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने ब्रह्मपुत्र नदी के आंकड़े साझा करने और भारत द्वारा चीन को चावल निर्यात करने के समझौतों पर हस्ताक्षर किए और वुहान में हुए महत्वपूर्ण सम्मेलन के बाद भारत-चीन संबंधों में हुए विकास को आगे बढ़ाया। इस बैठक के बाद मोदी ने ट्वीट किया , ‘इस साल के SCO के मेजबान राष्ट्रपति शी जिनपिंग से आज शाम मुलाकात हुई। हमने द्विपक्षीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। हमारी बातचीत भारत-चीन मित्रता में नई शक्ति प्रदान करेगी।’ बीते चार साल में इन दोनों नेताओं के बीच यह 14 वीं बैठक है।

साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव से और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन से बातचीत की, हालांकि ममनून हुसैन और मोदी जी के बीच महज 10 सेकंड की बातचीत हुई। ममनून हुसैन ने पहले मोदी की तरफ हाथ बढ़ाया था, जिसके बाद पीएम मोदी ने उनके प्रति गर्मजोशी दिखाई। बता दें कि दोनों देश पहली बार पूर्ण सदस्य के रूप में इस मंच पर अपने-अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने अफगानिस्तान को आतंकवाद के प्रभावों का ‘दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण’ बताते हुए कहा कि, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश में शांति के लिए जो साहसिक कदम उठाए हैं वो सराहनीय है। उन्होंने इसी क्रम में ईद के मौके पर अफगानी नेता द्वारा संघर्ष विराम की घोषणा का भी उल्लेख किया। SCO में अभी 8 सदस्य देश हैं, जो दुनिया की करीब 42% आबादी और वैश्विक जीडीपी के 20% का प्रतिनिधित्व करता है। मोदी के अलावा इस शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग , रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन भी शामिल हुए हैं। वर्ष 2001 में स्थापित इस संगठन के भारत के अलावा रूस, चीन, किर्गीज गणराज्य , कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान सदस्य हैं।

SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी ने ‘SECURE’ शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि, ‘एस’ से आशिआई नागरिकों के लिए सुरक्षा, ‘ई’ से आर्थिक विकास, ‘सी’ से क्षेत्र में संपर्क (कनेक्टिविटी), ‘यू’ से एकता, ‘आर’ से संप्रभुता और अखंडता का सम्मान और ‘ई’ से पर्यावरण सुरक्षा का अर्थ है ‘SECURE’। मोदी ने कहा, ‘‘हम एक बार फिर उस पड़ाव पर पहुंच गए है, जहां भौतिक और डिजिटल संपर्क अपने अर्थ को बदल रहा है। इसलिए हमारे पड़ोसियों और SCO क्षेत्र में संपर्क प्रस्थापित करना हमारी प्राथमिकता है।’’ इस संगठन को नाटो के समकक्ष माना जा रहा है‌।

मोदी-शी बैठक पर मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि, यह बैठक ‘‘बहुत सकारात्मक और आशावादी’’ रही और दोनों नेताओं ने वुहान वार्ता की प्रशंसा करते हुए इस वार्ता को ‘मील का पत्थर’ बताया। दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान में एक संयुक्त परियोजना शुरू करने पर चर्चा की। साथ ही उन्होंने कहा कि, कला और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क का एक नया तंत्र स्थापित किया जाएगा और भारत की ओर से विदेश मंत्री इसका नेतृत्व करेंगी, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री वांग यी करेंगे। इस संदर्भ में, शी ने चीन में भारतीय फिल्मों की बढ़ती लोकप्रियता का भी जिक्र किया और दंगल तथा बाहुबली फिल्मों के बारे में खास उल्लेख किया। विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि, बैठक के महत्वपूर्ण परिणामों में से एक यह है कि, चीनी पक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी की ओर से राष्ट्रपति शी को अगले वर्ष अनौपचारिक वार्ता के लिए भारत आने का दिया गया, निमंत्रण स्वीकार कर लिया‌। यह वैसी ही बैठक होगी जैसी वुहान में गत 27-28 अपैल को दोनों नेताओं के बीच हुई थी।

पंतप्रधान मोदी जी ने अपने भाषण में कहा कि, इस शिखर सम्मेलन का जो भी सफल निष्कर्ष होगा, भारत उसके लिए अपना पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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