मालदीव में भारत समर्थित राष्ट्रपति की हुई जीत, चीन का समर्थन करने वाले उम्मीदवार को मिली हार

मालदीव में चुनावों के परिणाम सामने आ चुके हैं और इस परिणाम के बाद भारत की ओर झुकाव रखने वाले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ने सफलता हासिल की है। क्योंकि मालदीव एक ऐसा देश है जहां पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जाने के लिए एक बार भी नहीं सोचा क्योंकि मालदीव के साथ भारत का संबंध थोड़ा टेढ़ा था जिसकी वजह से विदेश यात्रा के कारण चर्चा में रहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मालदीव की यात्रा पर नहीं गए।

सोलिह को मिला तख्त – 

मालदिवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) के इब्राहिम मोहम्मद सोलिह मालदीव के अगले राष्ट्रपति होंगे वहीं मालदीव के राष्ट्रपति के रूप में पद धारण करने वाले सोली एक ऐसे नेता होंगे जो भारत समर्थित थे और जिनकी सोच भारत के साथ संबंध सुधारने को लेकर काफी संतोषजनक थी। मालदीव में हुए राष्ट्रपति चुनाव में चोली ने मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को हरा दिया। मौजूदा राष्ट्रपति यामीन को 95,526 वोट मिले थे जबकि सोलिह को 133808 वोट मिले और इस बड़े अंतर से सोलिह ने राष्ट्रपति के पद पर अपनी जीत  सुनिश्चित कर दी। वहीं सोलिह की इस जीत से भारत में भी काफी संभावनाएं देखने को मिल रही हैं और कहा जा रहा है कि सोलिह की जीत के बाद भारत और पाकिस्तान में कई मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

गौरतलब है कि मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन का कार्यकाल काफी विवादित रहा विवाद इस कदर रहा है कि मालदीव में आपातकाल की भी नौबत आ गई और मालदीव को आपातकाल की स्थिति से भी गुजरना पड़ा। हालांकि अब्दुल्ला यामीन के जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जिस तरीके से चीन अपनी घुसपैठ मालदीव में बनाना चाहता है और वह मालदीव के सहारे भारत को घेरना चाहता है तो इस प्रकरण में भारत को मालदीव की तरफ से सोलिह का समर्थन जरूर प्राप्त होगा और इससे कई रास्ते  व्यापार-प्रबंधन और विदेश नीति को भी चुस्त-दुरुस्त किया जा सकता है।

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