RSS के कार्यक्रम में शामिल होंगे प्रणब दा, राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई

पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के बड़े नेता रहे प्रणब मुखर्जी  7 जून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रम में शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक वह नागपुर में दो दिन रहेंगे और 8 जून को वापस लौटेंगे। वह संघ शिक्षा वर्ग के तृतीय वर्ष में शामिल हो रहे स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे। इस वजह से एक तरफ कांग्रेस के कई नेता हैरान हैं, तो वहीं आरएसएस ने इस मुद्दे पर हो रहे बयानबाजी को गलत बताया है। इस प्रकार को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा है, कि आरएसएस कोई पाकिस्तानी संगठन नहीं है, जो लोगों को आपत्ति होनी चाहिए। लगातार हो रही बयानबाजी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से कहा गया है कि, जो लोग संघ को जानते हैं, उनके लिए ये कोई चौंकाने वाली बात नहीं हैं। हमने अपने कार्यक्रमों में पहले भी देश के बड़े और अच्छे लोगों को बुलाया है, वैसे हमने इस बार प्रणब मुखर्जी को बुलाया है और ये उनका बड़प्पन है कि, उन्होंने हमारा न्यौता तहे दिल से स्वीकार भी कर लिया है।

कांग्रेस नेता टॉम वडक्कन ने कहा है कि, प्रणब मुखर्जी अब किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी और मैं आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि, अब उनको न्योता आया है, अगर वह वहां पर जाएंगे, तो क्या बोलेंगे और क्या होगा? ये तो कार्यक्रम के बाद ही पता चलेगा, इसलिए अभी इस पर मैं कुछ नहीं कह सकता हूं। ‎पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने कहा कि, उन्हें मुखर्जी के समारोह के बारे में जानकारी नहीं है। पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि, मुखर्जी एक बुद्धिमान और ‘धर्मनिरपेक्ष मानसिकता’ वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा, ‘उनके केवल वहां जाने भर से उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आएगा। मुखर्जी जो हैं, वही रहेंगे।’ कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने ‌कहा की, ‘न्योता पूर्व राष्ट्रपति को मिला है और उन्होंने इसे स्वीकार किया है।’ पूर्व राष्ट्रपति ही इसका सबसे सही उत्तर दे पाएंगे। मणिशंकर अय्यर ने कहा, ‘राष्ट्रपति ‎सही समय पर फैसला करेंगे‌ और किसी बाहरी का टिप्पणी करने का यह सही समय नहीं है।’ यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अभी तक इस मामले पर अपने विचार नहीं रखे हैं।

आरएसएस हर साल देश भर में अपने शिविरों का आयोजन करता है। तृतीय वर्ष वर्ग का आयोजन हर साल गर्मी में आरएसएस मुख्यालय नागपुर में होता है। पहले और दूसरे वर्ष के शिविरों में हिस्सा लेने वाले तृतीय वर्ष में पूर्णकालिक प्रचारक बन सकते हैं। सूत्रों के अनुसार संघ शिक्षा वर्ग-तृतीय वर्ष का 25 दिवसीय कार्यक्रम हेडगेवार स्मृति मंदिर के अहाते में चल रहा है और प्रणब मुखर्जी इस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इस बार पूरे देश से लगभग 700 से अधिक स्वयं सेवक इस प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण ले रहे हैं‌।

प्रणब  दा कांग्रेस के साथ 1969 से जुड़े हुए हैं, तब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राज्यसभा सदस्य चुने जाने में उनकी मदद की थी। वह उनके विश्वसनीय नेताओं में से एक थे। केंद्रीय वित्तमंत्री के रूप में प्रणब का पहला कार्यकाल 1982-84 तक रहा। वो देश के रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि ‌मुखर्जी के राष्ट्रपति पद पर कार्यकाल के दौरान मोहन भागवत से राष्ट्रपति भवन में 4 बार मुलाकात भी हुई थी।

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