गंगा एक्ट बनाने की मांग लेकर बैठे संत का हुआ निधन,

एक और जहां केंद्र सरकार ने गंगा मिशन और राम मंदिर पर खूब वोट बैंक बनाया लेकिन अब ऐसी खबरें सुनने को मिल रही है कि लोग इन्हीं सब चीजों को लेकर अपनी मौत तक कुर्बान कर दे रहे हैं। जी हां एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसमें गंगा ऐप बनाने की मांग को लेकर बैठे संत ने अपने प्राणों की आहुति दे दी फिर भी सरकार ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है।

गंगा रक्षा के लिए कर रहे थे तपस्या – 

मातृ सदन आश्रम में स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद 22 जून से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे। उनकी मांग थी कि गंगा सफाई को लेकर कड़े कानून का प्रावधान होना चाहिए, और इसके लिए उन्होंने गंगा एक्ट लाए जाने के लिए अनशन शुरू कर दिया, लेकिन प्रशासन ने पहले तो उनका अनशन तुड़वाने का प्रयास करना चाहा और फिर आश्रम के पास इकट्ठा हो रहे लोगों को दूर करने की कोशिश की। इससे पहले भी सानंद स्वामी को 1 हफ्ते के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था लेकिन उन्होंने पिछले कुछ दिनों से जल का भी त्याग कर दिया था जिसके बाद उन्होंने आज ऋषिकेश एम्स में अंतिम सांस ली। सानंद स्वामी गंगा पर निर्माणाधीन जल-विद्युत परियोजनाओं को बंद करने, प्रस्तावित परियोजनाओं को निरस्त करने और कोई भी नई परियोजना स्वीकृत न करने समेत वर्ष 2012 में तैयार किए ड्राफ्ट पर गंगा एक्ट बनाने की मांग को लेकर स्वामी सानंद गत 22 जून 2018 से तप कर रहे थे। इस अवधि में वह सिर्फ जल, नमक, नींबू और शहद ले रहे थे। लेकिन बीते 9 अक्टूबर से उन्होंने जल तक भी त्याग कर दिया था।

वहीं अब मातृ सदन के स्वामी शिवानंद महाराज का कहना है कि जिस तरह से उनके शिष्य ब्रह्मचारी निगमानंद की हत्या की गई थी, ठीक उसी प्रकार स्वामी सानंद की भी हत्या की गई है। हत्या करने वाले में जिलाधिकारी हरिद्वार, उपजिलाधिकारी मनीष कुमार सिंह, सीओ कनखल, एसओ कनखल, चौकी इंचार्ज जगजीतपुर व एक बड़े केंद्रीय मंत्री पर हत्या का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा है कि वह कठोर अनशन करेंगे।

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