का बबुआ पढ़वा?? रुपैया लगतवा …..

कहते हैं जिस देश मे शिक्षा बाजार की वस्तु बन जाए उस देश का अंत निश्चित है। और हम तो डिग्रियां मूली टमाटर की तरह बेच रहे जहाँ देखो वहां हर डिग्री का बाजार भाव पोस्टर बैनर मिल जाएगा। डॉ बने 25 लाख में MBA बने 15 लाख में… 6 महीने में नौकरी की… गारंटी …ब्ला ब्ला ब्ला जिसको जो भाव पट गया उसमे उ निपट गया जिसको भाव नही पटा उसके लिए व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी और भारत माता की जय हइये है। जिसको भाव पटा उसके लिए one टाइम रिटर्निंग पालिसी भी तो हइये है एक बार नौकरी हो गया बियाह करो डबल वापस ।

आइये 25 का 50,15 का 30 और ठेंगा दिखियेगा तबहियो 5 देंगे। मतलब सब सेटल सब बिजी सब खुश जो खुश नही उसको नही उसको हमारे नयका इंडिया वाले नेता जी विश्व गुरु वाला सपना देखा के खुश करिये देते हैं । आइये एक्के रुपैया में चार चूस बाले बच्चे सब खुश। अब स्कूल में मास्टर अउ कॉलेज में प्रोफेसर है कि नही का दिक्कत है हम विश्व गुरु बनिये क्लास गुरु हो न हो। अब केकरो का फर्क पड़ता है कि बिहार के 40 से 50% शिक्षक के पद खाली है । का फर्क पड़ता है कि बिहार के टॉप यूनिवर्सिटी पटना यूनिवर्सिटी में 20 हजार छात्र पर 740 शिक्षक के पद मंजूर है ओकरा में 420 ख़ालिये है ।

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