चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर, धारा 377 हटाई तो फ़ैल जाएगी अराजकता

Article 377
Article 377

समलैंगिकता को लेकर अपराध की श्रेणी में लाने वाली भारतीय दंड संहिता धारा 370 के ऊपर आज चौथे दिन भी सुनवाई जारी है। सुनवाई के दौरान एक ऐसा बयान सामने आया है जिसमें चीफ जस्टिस ने कहा है कि अगर धारा 377 हटाई गई या उसे रद्द किया गया तो अराजकता का माहौल उत्पन्न हो सकता है। इसलिए ऐसा करना उचित नहीं है। एलजीबीटी समुदाय व कई एनजीओ की याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट धारा 377 पर आज चौथे दिन भी सुनवाई कर रही है। इस मामले की सुनवाई संविधान पीठ की 5 जजों की बेंच कर रही है। जबकि इन 5 जजों के अलावा चार वरिष्ठ जज भी शामिल है।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा धारा 377 हटाने पर फैल जाएगी अराजकता –

5 जजों की पीठ ने धारा 377 पर  चौथे दिन भी सुनवाई जारी रखी है, क्योंकि यह मामला काफी संवेदनशील है और समय-समय पर अक्सर ऐसे मामले प्रकाश में आते हैं जिसमें समलैंगिक जोड़ों को एक साथ पाने पर उन्हें दंड दिया जाता है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने सुनवाई के दौरान कहा कि धारा 377 को रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि अगर ऐसा किया गया तो अराजकता का माहौल उत्पन्न हो जाएगा। चीफ जस्टिस ने आगे कहा कि हम इस मामले में पुरुष से पुरूष, और महिला व पुरुष के बीच सहमति से बने संबंधों पर हैं। आप अपनी यौन प्राथमिकताओं को बिना सहमति के दूसरों पर नहीं थोप सकते। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि ‘सेक्स’ और सेक्स की ओर झुकाव को लिंक मत कीजिए। वहीं इस सुनवाई के दौरान चार वरिष्ठ जज में आरएफ नरीमन, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा शामिल हैं।

वहीं ईसाई संस्थाओं  ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, इस कानून के अंतर्गत 3 चीजें शामिल हैं। जबकि धारा 377 में दो हिस्से हैं। ‘पहला है शारीरिक संभोग, जो प्रकृति के तहत है’ और दूसरा ‘उसके खिलाफ’। ईसाई संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा कि किसी को जान से मारने की धमकी देकर भी हम शारीरिक संबंध बनाने की इजाजत हासिल कर सकते हैं। इन संस्थाओं ने कहा कि शीर्ष अदालत साफ करे कि शारीरिक संभोग क्या है इसकी परिभाषा निर्धारित करें। कई याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आईपीसी की धारा 377 से ‘सहमति’ शब्द नहीं है जिसे इस प्रावधान में लाया जाना चाहिए. फिलहाल धारा 377 के तहत दो व्यस्क समलैंगिक लोगों के बीच बनाए गए संबंध को अपराध करार दिया जाता है। गौरतलब है कि धारा 377 के मामले को केंद्र सरकार ने पूरी तरीके से सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दिया है और अब जो भी फैसला करना है वह सुप्रीम कोर्ट करेगा।

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram