जानिए रेशमा का बाल विवाह और दहेज मुक्त लड़ाई का सफर

आज पूरे भारत देश में बाल विवाह और दहेज मुक्त समाज की स्थापना के लिए कई तरीके के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन कुछ लोग समाज में ऐसे भी हैं जो समाज को एक स्वस्थ एवं फलीभूत बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। इसी कतार में बिहार के किन्नर, समाज को बाल विवाह से मुक्त करके और दहेज प्रथा को जड़ से उखाड़ फेंकना चाहते हैं,  जिसके लिए वह लगातार प्रयत्नरत हैं। इसी कड़ी में हम आज आपको बताने जा रहे हैं रेशमा की कहानी जिन्होंने बाल विवाह और दहेज मुक्त समाज के निमार्ण हेतु जंग छेड़ रखी है।

 कौन हैं रेशमा , और क्या है उनका लक्ष्य – 

‘किन्नर कला जत्था’ “दोस्तानासफर” का गठन समाज को बेहतर और नए तरीके से उभारने के लिए लगातार प्रयास करता रहता है।  समाज में फैले  बाल विवाह और दहेज प्रथा की कुरीतियों को समाप्त करने के लिए किया गया है यह संगठन हमेशा ही कोशिश में जुटा रहता है। वहीं इसके संचालन में रेशमा प्रसाद हमेशा सम्मिलित रहती हैं। किन्नर कला जत्था नुक्कड़ नाटक के लिए प्राय:  भ्रमण करता रहता है जिसके अंतर्गत ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें दहेज एवं बाल विवाह के विरुद्ध नाटक का मंचन किया जाता है। बाल विवाह एवं दहेज मुक्त समाज के लिए नुक्कड़ नाटक का आयोजन पटना के कारगिल चौक गांधी मैदान मैं किया गया जिसमें सुमन मित्रा, संतोषी किन्नर, डिंपल जैस्मीन, वीरा यादव, रानी तिवारी, मानसी किन्नर की उपस्थिति में संपन्न हुआ। आज समाज में किन्नर समाज के लोग, बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को जड़ से मिटाने के लिए काम कर रहे हैं, यह समाज को बेहतर बनाने के लिए अति आवश्यक है। समाज के अन्य लोगों को भी इन लोगों से सीख लेनी चाहिए और उनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए।

गौरतलब है कि आज समाज में ऐसे लोगों की बहुत आवश्यकता है जो एक सभ्य समाज की स्थापना करने के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार हैं। आज का रिपोर्टर ऐसे जाबाज और सम्मानीय सोच रखने वाली रेशमा को धन्यवाद अदा करता है, और उनकी इस लड़ाई में अग्रिम शुभकामनाएं भी देता है।

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