जाने बच्चों की नजर में उनकी दुनियाँ

पुनाईचक के बच्चे बाल दिवस का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने शिक्षक दिवस पूरे धूमधाम के साथ मनाया था। उन्हें एहसास था कि आज कुछ खास जरूर होगा। खुले आसमान के नीचे चलने वाले इस क्लास में शिक्षक पढ़ाने से ज्यादा विश्वास करते हैं उनसे बात करने में। वे बात करते हैं देश के प्रसिद्ध समाजसेवी आंदोलनकारी, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक एवं अन्य महापुरुषों की। वे विश्वास करते हैं कि खेल-खेल में शिक्षा दी जाये, ताकि पढाई को बोझ की विषय वस्तु ना लगे।

वे जानते थे, आज (14 नवंबर) उन सबके चाचा नेहरू का जन्मदिन है। इन्होंने उनकी कहानियाँ अतिथि शिक्षक मनीष कुमार से सुनी थी की देश के पहले प्रधानमंत्री बच्चों से बड़ा प्रेम करते थे। उनकी नजर में राष्ट्र देश की सबसे बड़ी संपत्ति बच्चे हैं, इसलिए उन्हें सदा खुश रखना का प्रयत्न करना चाहिये। उनका कहना था कि किसी भी राष्ट्र की संपदा का अंदाजा वहां के स्कूलों की संख्या से लगाया जा सकता है। बच्चे यह भी जानते थे कि उन्हें कोई भी उपहार लेना पसंद नहीं था। उन्होंने सन्देश दिया कि यदि तुमने बच्चों के चेहरे पर मुस्कान ला दी तो समझ लेना कि तुमने मुझे दुनिया की सबसे खूबसूरत उपहार भेंट में दिया है। तभी तो हम सब मिलकर उनके जन्मदिन को बच्चों की खुशियों हेतु त्यौहार के रूप में मनाते हैं।

आज बाल दिवस के इस पावन अवसर पर खुले आसमान के नीचे चलने वाले इस संसाधन विहीन विद्रोही क्लासेज में बच्चों से मिलने और उनकी खुशियों में शरीक होने के लिए डॉक्टर शंभू कुमार सिंह जी आये थे। उन्होंने बच्चों से क्लास के अनुभव के बारे में पूछा। सभी शिक्षक चौकन्ने हो गए कि कुछ भी जवाब मिल सकता है। लेकिन यह क्या, उन बच्चों ने कहा सर हम लोग तो सिर्फ इतना बता सकते हैं, यदि सर हमलोगों के बीच में नहीं आते हैं तो इरोम चानू शर्मिला कौन हैं ? नहीं जान पाते हैं और ना ही मैं एयर होस्टेस का सपना देख पाते। जब यही के एक शिक्षक ने पूछा कि मान लो, यदि तुम्हें ईश्वरीय शक्ति से अपनी दुनिया बनानी हो तो कैसी दुनिया बनाओगी। सुनीता (बदला हुआ नाम) ने कहा 4 साल पहले मेरे पिता जी का स्वर्गवास हुआ था। तब से मेरी पढ़ाई बीच में ही छूट गई। मैं चाहूंगी कि दुनिया में हर लोग शिक्षित हो जाए ताकि कोई किसी का मजाक नहीं आया और ना ही किसी अशिक्षित को बोर फील कराएं। वही ममता ने बताया कि मेरी नजर में जो दुनिया होगी, वहां की सड़कें बेहतर होंगी, डॉक्टर अच्छे, सस्ता एवं फ्री में इलाज करेंगे। बढ़िया स्कूल होगा और परिवार में इतनी खुशियां होगी कि हर दिन त्योहार बनेगा। वह रूपा को अपनी बात बताने में शर्म आ रही थी।

दूसरे प्रयास में उसने बताया मेरी दुनिया में अपराध नहीं होगा और महिलाओं पर अत्याचार अत्याचार थमेगा, क्योंकि मैं बड़ी होकर पुलिस अफसर जो बनूंगी। इन सबसे बच्चों की नजर में उनकी दुनिया के प्रति (वर्तमान में इनके शिक्षा के प्रतिकूल अवसर है और आने वाले समय में वे शिक्षित होकर क्या करना चाहती हैं ) जो सोंच है वह उपस्थित लोगों के अंदर स्पष्ट हुआ। इस विशेष मौके पर बच्चों की तरफ से आमंत्रित, श्री निवेश कुमार ने बच्चों को समय के महत्व के बारे में बताया। बचपन को मस्ती के साथ पढ़ाई में बिताओ आज जो बच्चे बढ़िया घर पौष्टिक भोजन और अच्छे कपड़े के लिए तरसते हैं, लेकिन घर में आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण अपना शौक पूरा नहीं कर पाते हैं। उनके लिए अभी सुनहरा मौका है रिमांशु सर सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारियों में लगे हैं, वही रमन सर बिहार पुलिस की सेवा में है तीसरे साथी विद्रोही को भी अपनी अतिव्यस्त नौकरी से छुट्टी मिलने पर अपना अमूल्य समय और ज्ञान उपहार में दे रहे हैं तो इसका लाभ उठाइए।

आप जानते हैं कि हर रोगों की एक दवाई, पढ़ाई-पढ़ाई और सिर्फ पढ़ाई। फिर उन्होंने सभी बच्चों के बीच में अति उपयोगी पाठ्यसामग्री, डायरी के साथ चॉकलेट का वितरण किया गया। जो बच्चों की खुशियों में चार चांद लगा रहे थे। फिर सभी शिक्षक अतिथिगण और बच्चे साथ मिलकर नाश्ते के साथ फोटोग्राफी का आनंद लेने से खुद को रोक नहीं पाये। इसी बीच एक बच्ची अपने घर से खुद की बनाई पेंटिंग लाकर उत्साहपूर्वक दिखाने लगी। इसे देखकर विद्रोही का हृदय गर्व से भर गया की कोशिश एक कतार में, जिंदगी बाजार में। मुश्किलें तो आएंगी, द्वार खट-खटाएगी। यह मेहनत रंग लाएगी, तू सफल हो जाएगी। इन्हीं उम्मीदों के साथ हम सब आपस में बात कर ही रहे थे कि उधर ममता DSLR कैमरे को ऑपरेट करना सीख रही थी। वाकई में इस खुशनुमा माहौल में बच्चे और बूढ़े में फर्क करना मुश्किल हो रहा था। इस समय हृदय के अंदर विशाल मंथन चल रहा था और उससे होने वाली आत्मसंतुष्टि को शब्दों में बयां करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन प्रतीत होता था।

आप विश्वास करें, यह बच्चे आपका गुस्सा शांत कर देंगे और आपको माफ करना भी सिखा देंगे। अंत में कार्यक्रम के समापन के समय सभी ने एक साथ मिलकर संकल्प लिया कि

1. हम अपने जीवन का अधिकतर समय शिक्षा ग्रहण करने और लोगों को शिक्षा प्रदान करने में लगाएंगे।

2. हम पर्यावरण को बचाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएंगे।

3. हम भ्रूण हत्या बाल विवाह और दहेज उत्पीड़न का विरोध करेंगे और इसके खिलाफ जागरूकता फैलाएंगे।

4. स्वच्छ भारत मिशन को सफल भूत करने के लिए अपनी जिम्मेदारियों का पूर्ण रुप से पालन करेंगे।

5. लड़के लड़कियों के साथ समानता का भाव रखेंगे और असमानता की खाई को पाटने के लिए जन जागृति अभियान चलाएंगे।

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