परवेज़ मुशर्रफ नहीं आए तो हुआ चुनाव नामांकन खारिज , अब नहीं लड़ पाएंगे चुनाव

25 जुलाई को पाकिस्तान में होने वाले आम चुनावों के लिए मंगलवार को मुशर्रफ के चुनावी नामांकन को एक चुनावी अधिकारी ने खारिज कर डाला। अधिकारी ने 2013 के पेशावर उच्च न्यायालय के फैसले का आधार बताया जिसने मुशर्रफ के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाया था।

74 वर्षीय मुशर्रफ ने खैबर पख्तुनख्वा प्रांत में स्थित चित्र्रल से अपना नामांकन पत्र दायर किया था। चुनाव लड़ने पर पेशावर उच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए आजीवन प्रतिबंध के खिलाफ मुशर्रफ ने 2013 में याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नामांकन दाखिल करने में छूट दी थी, लेकिन शर्त यह थी कि उन्हें 13 जून को अदालत में पेश होना होगा। जब उन्होंने खुद को पेश नहीं किया तो सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते पूर्व तानाशाह को दी गई परमिट को वापस ले लिया। इसके साथ ही अदालत ने अनिश्चित काल तक मामले की सुनवाई स्थगित कर दिया हैI

मुशर्रफ ने कराची से भी नामांकन भी दायर किया हुआ है। वहां वे मंगलवार की शाम तक चुनाव अधिकारी के सामने उपस्थित थे। अधिकारियों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कारण नामांकन भी खारिज कर दिया जाएगा।

मुशर्रफ ने कराची से नामांकन भी दायर किया है। वहां वे मंगलवार की शाम तक चुनाव अधिकारी के सामने उपस्थित होने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कारण वहां से भी उनका नामांकन खारिज कर दिया जाएगा।

गिरफ्तारी के डर व लम्बी बीमारी के डर से जूझ रहे पूर्व मिलिट्री तानाशाह परवेज़ मुशर्रफ दुबई में रहते हुए वतन वापस आने की उम्मीद पाल रहे थे लेकिन इस झटकानुमा ख़बर के बाद अब उनके सारे अरमान धरे के धरे रह गए है| हाँ यह ज़रूर है कि पाकिस्तान के लिए चैन की सांस लेने का वक़्त है जो कि अब उसे इमरजेंसी एवं मिलिट्री राज जैसी अलोकतांत्रिक शासन के खतरे से मुक्ति मिल गई है और इसके साथ ही मुशर्रफ के राजनैतिक करियर का अंत फिक्स हो चुका है , बेहतर होगा कि वह सह-सम्मान राजनीति से रिटायरमेंट ले लें|

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