प्रतिभा को मंच, हौसलों को उड़ान, उम्मीद को सफलता देती ‘सुपर-30’

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ईश्वर हमें वो कुछ नहीं देता जो हमे अच्छा लगता हैं बल्कि हमें वो देता है जो हमारे लिए अच्छा होता है। ऐसा ही कुछ हुआ अजय कुमार वर्मा के पुत्र श्रेयश राज के साथ। कहां अजय चाहते थे कि उनके बच्चे की पढ़ाई, किसी प्रकार से पूर्ण हो व वो अपने पैरों पर खड़े हो जाएं, जबकि ईश्वर ने उनके बच्चों के लिए इस से बेहतर विकल्प सोच रखा था। यह बिल्कुल सत्य है कि ईश्वर भी मदद रूपी ‘पंख’ उनको ही देता है जिनके हौसलों की उड़ान ऊंची होती है। आइए जानते है कौन है अजय? कौन है श्रेयश? ईश्वर ने कौन सा विकल्प सोच रखा था? श्रेयश ने ऐसा क्या हासिल किया ?

अजय कुमार वर्मा बिहार के गया शहर में गोवलबीघा मोहल्ला के निवासी है। इस निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में अजय के अलावे उनकी पत्नी श्रीमती अर्चना वर्मा एवं दो बच्चे श्रेयश राज और चंदन। अजय जी का सम्पति के नाम पर गया शहर में मुन्नी मस्जिद के पास एक पैतृक घर, जिसमे वो संयुक्त परिवार के साथ रहते थे और आमदनी के नाम पर पेट्रोल पंप की नौकरी। किन्तु वो परिवार के भरण-पोषण के किये पर्याप्त नहीं था, किन्तु उन्हें इस बात की खुशी थी कि श्रेयश राज और चंदन, दोनों ही पढ़ाई में होशियार ही नही बल्कि हमेशा कक्षा में अव्वल आते थे। वो ईश्वर को धन्यवाद देते हैं, जीवन-यापन हो ही रह था। बढ़ते बच्चों के साथ खर्चे भी बढ़ रहे थे, किन्तु आमदनी सीमित थी। श्रेयश गया के नाजरथ अकादमी का छात्र था, प्रतिभाशाली होने के कारण विद्यालय की तरफ से उसे छात्रवृति मिलती थी। श्रेयश की प्रतिभा का सम्मान दशवीं में 10 CGPA के रूप में मिला। इस सफलता की खुशी को भविष्य की चिंता ने फीका कर दिया, यहां तक का सफर विद्यालय के वजीफे के कारण चल गया, किन्तु आगे क्या और कैसे?

वर्मा परिवार इस उधेड़बुन में ही था कि अजय की नौकरी छूट गयी, एक समस्या से जूझते हुए इस परिवार के लिए दूसरी समस्या ने उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। छोटा शहर होने के कारण अवसर सीमित थे, नयी नौकरी नहीं मिल पा रही थी, आमदनी का कोई अन्य स्त्रोत न होने के कारण अजय पर दबाब बढ़ रहा था। दबाब और हताशा का प्रतिकूल असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा। तेजी से बदलते इन घटनाक्रमों में भी श्रेयश ने हिम्मत नहीं खोया बल्कि इनसे उत्पन्न अभाव के प्रभाव से श्रेयश और दृढ़प्रतिज्ञ हो गया।

श्रेयश को एक मित्र ने ‘अभयानंद सुपर 30’ व उसके प्रवेश परीक्षा के बारे में जानकारी दी। श्रेयश ने आवेदन किया और उसका चयन भी हो गया। कागजी प्रक्रिया के दौरान अजय की मुलाकात सुपर 30 के पंकज से हुई। उनकी माली हालत जान कर पंकज ने अभयानंद से बात की व उनकी स्थिति से अवगत कराया। अजय को सुपर 30 में वार्डन की नौकरी दे दी गयी, जहाँ वो आज भी नौकरी कर रहे है। श्रेयश के उज्जवल भविष्य की उम्मीद व आमदनी का स्थायी स्त्रोत शुरू होने से उन्हें न सिर्फ मानसिक शांति मिली बल्कि आज वो बिल्कुल स्वस्थ है व सामान्य जीवन जी रहे है। सुपर-30 ने ना सिर्फ श्रेयश को बल्कि उसके पूरे परिवार को भी सहारा दिया। श्रेयश का छोटा भाई चंदन भी सुपर-30 के अगले बैच ‘आईआईटी 2018‘ का छात्र है।

श्रेयश को उम्मीद की एक किरण ‘सुपर 30’ के रूप में दिखी। फिर तो जैसे प्रतिभा को बेहतरीन मंच, हौसले को उड़ान और उम्मीद को सफलता हाथ लग गई। श्रेयश ने न सिर्फ आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास की बल्कि 562वां रैंक भी प्राप्त किया। श्रेयश राज आज दिल्ली आईआईटी में मैकनिकल शाखा का छात्र है। आज उसकी इस कामयाबी पर घरवाले, संबंधी लोग गर्व ही नहीं करते बल्कि अब तो उसका उदाहरण भी दिया जाने लगा है।

श्रेयश ने हमारे प्रतिनिधि को बताया कि

“सुपर-30 में मेरा आना ‘life changing’ था, मैने तो कभी आईआईटी के बारे में सोचा भी नहीं था और 500वां रैंक तो ख्वाब से भी बड़ा है! यह संभव हो पाया तो सिर्फ सुपर-30 में अभयानंद सर, पंकज सर के मार्गदर्शन से, प्रेरणात्मक रवैये से। उन्होंने शुरुआत में मुझसे पूछा कि क्या रैंक उम्मीद करते हो, मैनें हिचकते और झिझकते हुए 2000 कहा था। उनके पढाने की अनूठी शैली, कठिन प्रश्नों के अनूठे समाधान, मार्गदर्शन से मेरा आत्मविश्वास बढ़ता गया, ऐसा लगा कि मैं कर सकता हूँ।”

पूर्व डीजीपी व सुपर 30 के संस्थापक अभयानंद के बारे में श्रेयश ने कहा

“उनकी विनम्रता, उनकी सुलभता, उनकी उपस्थिति मात्र ही हमारे लिए उत्साहवर्धक होता है। वो मेरे आदर्श है, मैं भी सफल होकर उनके जैसा ही समाज के लिए कुछ करना चाहता हूँ। उन्होंने मुझे खुद पर भरोसा करना सिखाया, लक्ष्य के प्रति जुनून उत्पन्न करना सिखाया। वो हमारे अभिभावक है जिनका मार्गदर्शन सिर्फ प्रवेश परीक्षा तक ही सीमित नही बल्कि सदैव हैं। “

अजय जी ने कहा कि ” पंकज सर, अभयानंद सर के मार्गदर्शन व सहयोग से श्रेयश को यह मुकाम हासिल हुआ है, हमे तो लगा कि उसकी बारहवीं भी बहुत कठिनाई से हो पाएगी। ईश्वर एक दरवाजा बंद करता है तो कई दरवाजे खोल भी देता है, मेरी नौकरी का जाना, श्रेयश का सुपर-30 में चयन होना, इस बात की तसदीक करता है कि ईश्वर ने उसके लिए कुछ और सोच रखा था। श्रेयश और मेरे पूरे परिवार के लिए जो अभयानंद सर,पंकज सर और सुपर-30 की पूरी टीम ने जो किया उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। मेरे छोटा पुत्र चंदन भी यहीं से इसी साल आईआईटी में बैठेगा, आप सबों का भी आशीर्वाद उसे चाहिए।”

अभयानंद जी से बात करने पर उन्होंने बताया कि

” सुपर-30 की बुनियाद ही इस सोच पर थी कि समाज अपनी समस्याओं का हल खुद ही ढूंढे व इसका पहल भी खुद ही करे। यह सुविधावंचित बच्चे, अपने बेहतर कल के पश्चात अपने ऐसे ही सुविधवंचित प्रतिभाशाली बच्चों की मदद जरूर से करना चाहेंगे। मैं हमेशा ही यही कहता हूं कि मदद करते चलिए, आपको भी नही मालूम कब भगवान आपको भी किसी का भगवान बनाकर पहुंचा दे।”

आपको बता दे कि ‘अभयानंद सुपर-30’ के श्रेयश का बैच पहला बैच था जिसमे मात्र 22 अभ्यर्थी थे, जिनमे से 19 छात्र जेईई एडवांस्ड में बैठे और अंततः 14 छात्रों का आईआईटी में चयन हुआ। जेईई 2017 का गुवहाटी जोन का 3रा एवं 5वां टॉपर अभयानंद सुपर-30 से ही था। श्रेयश सहित अन्य 6 छात्र आईआईटी दिल्ली में वे अन्य 7 विभिन्न आईआईटी में है। इस सभी सफल बच्चों की कहानी हम आप सबों से यहां ‘आज के रिपोर्टर’ पर ही साझा करते रहेंगे, उसके लिए आप बने रहे हमारे साथ.. 

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आज का रिपोर्टर सलाम करता है अभयानंद जी, पंकज सर व सुपर-30 के सभी शिक्षकों व सहयोगीयों की टीम को और ‘उर्मिला सिंह प्रतापधारी सिन्हा फाउंडेशन’ व इसके ट्रस्टी श्री ए. डी. सिंह को, जिन्होंने आगे बढ़कर इन सुविधवंचित बच्चों को कल के भविष्य के रूप में संवारा।

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