रामधारी सिंह दिनकर जी की जयंती पर विशेष, बिहार से निकलकर राष्ट्रकवि बनने का सफर

वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल, दूर नहीं है;

थक कर बैठ गए क्या भाई! मंजिल दूर नहीं है।

बिहार राज्य के मंगुरे के सिमरिया नामक गांव में रहने वाले श्री रवि सिंह और श्रीमती मन रूपा देवी के पुत्र रामधारी सिंह दिनकर जी का जन्म 23 सितंबर 1980 में हुआ था। रामधारी सिंह दिनकर जी ने अपनी पढ़ाई बिहार बोर्ड से ही पूरी करी। बी.ए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वह उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधान अध्यापक बन गए।

रामधारी जी ने 1934 में सरकारी विभाग के सब रजिस्ट्रार के नौकरी की और उसके बाद उन्होंने 1950 में  मुजफ्फरपुर के स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला। “राष्ट्रपति   डॉ०राजेन्द्रप्रसाद” ने दिनकर जी को राज्यसभा का सदस्य मनोनीत कर दिया। कुछ समय तक दिनकर जी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे।उसके पश्चात् भारत सरकार के गृह, विभाग में हिंदी सलाहकार के रूप में उन्होंने दीर्घकाल तक कार्य किया और इसी के साथ हिंदी के संवर्धन और प्रचार–प्रसार में लगे रहे। हिन्दी के प्रति दिनकर का शुरू से ही जुड़ाव रहा है और इनके इसी लगाव औरअधिक समर्पण और योगदान के कारण इन्हें “ज्ञानपीठ पुरस्कार” से भी सम्मानित किया गया। रामधारी सिंह दिनकर जी ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण काम किए जिसके लिए उन्हें अनेक पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। उनमें से एक पद्मभूषण भी रहा। सन् 1959 में भारत सरकार ने इन्हें “पद्मभूषण” से सम्मानित किया और सन 1962 में भागलपुर विश्वविद्यालय ने डी० लिट्० की उपाधि प्रदान कर दी। प्रतिनिधि लेखक और कवि के रूप में इन्होंने अनेक देशों की  यात्राये की हैं। दिनकर जी का असामयिक देहान्त 24 अप्रैल 1974 को हो गया।

रामधारी सिंह दिनकर जी ने अपने लेख और कविताओं से पूरे देश में अपने अस्तित्व का परचम लहराया है। उनकी लिखे गए लेख आज तक अमर हैं और लोग उनके लिखे गए लेख को पढ़ते भी हैं और पसंद भी करते हैं। रामधारी सिंह दिनकर जी ने अपना परचम गद्य और पद्य दोनों में लहराया है। उनके द्वारा लिखे गए अनेक दर्शन एवं संस्कृत, निबन्ध ग्रन्थ, यात्रा साहित्य, बाल – साहित्य और काव्य आज भी लोगों के जहन में ऐसे बसे हुए हैं जैसे उनकी याद।

रात यूं कहने लगा मुझसे गगन का चांद,

दमी भी अनोखा जीव है।

उलझने अपनी बनाकर आप ही फंसता, फिर बेचैन हो जगता न सोता है।

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