विश्व युद्ध के अनाथों का दिवस

विश्व युद्ध के अनाथों का विश्व दिवस फ्रांसीसी संगठन, Sos Enfants en Destresses के द्वारा शुरू किया गया था।यह विशेष दिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को विशेष रूप से कमज़ोर समूह की दुर्दशा को पहचानने एवं उनके खिलाफ आवाज़ उठाई जा सके इसके लिए सक्षम बनाया जाए इसलिये आयोजित किया जाता है।

दुनिया भर में सौभाग्य से उनके लिए जगह हो सकती हैं लेकिन दुर्भाग्य से,उन्हें शायद ही कभी इष्टतम सामाजिक और व्यक्तिगत विकास के लिए समय,ध्यान और प्यार प्राप्त होता है। युद्ध के अनाथों के संबंध में किये गए कई शोध से पता चला है कि अनाथों में भावनात्मक सामाजिक और शारीरिक विकलाँगताएँ बढ़ रही हैं।

विकसित विश्व मे अनाथों की संख्या कम है चूंकि ज्यादातर बच्चे अपेक्षा करते हैं की उनके माता पिता बचपन से जीवित रहें,लेकिन उन देशों में जो युद्ध और एड्स जैसी महान महामारियों के अधीन हैं,वहाँ अनाथों की संख्या अधिक है। प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध एवं आतंकवाद ने बहुतों को बेसहारा किया है।

उदाहरण के तौर पर पोलैंड में 300000,युगोस्लाविया में 200000 के साथ साथ आज अफगानिस्तान में करीब 30 साल की लड़ाई के बाद 60 लाख से अधिक अनाथ खुले आकाश के नीचे सड़क पर सोने को मजबूर हैं। यह पूरी मानवीय सभ्यता के लिए दुखद है की आज भी इतनी संख्या में अनाथ, बेसहारा बन भटक रहे हैं। आज इन अनाथ और बेसहारा लोगो को पुनर्वास एवं सहयोग की जरूरत है।

विश्व युद्ध अनाथ दिवस के माध्यम से हम इन अनाथों के लिए कुछ भी रचनात्मक कर पाएं तो यह मानव जीवन धन्य समझा जाएगा।।

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