सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर आया ये बड़ा फैसला

आज हमारे देश को आजाद हुए  कितने साल हो गए, विकास की राह पर लगातार आगे बढ़ते हुए भारत देश में आज भी ऐसी कुरीतियां समाज में अपना पैर जमाए हुए खड़ी हैं, जो उखड़ने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ ऐसा ही एक मामला सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का है, जहां पर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर मनाही है। लेकिन इस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया यह फ़ैसला – 

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पांच जजों की पीठ ने घोषणा की है कि आने वाले समय में अब महिलाएं सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी। सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला 4:1 के अनुपात से घोषित कर दिया है,जो अब जल्द ही लागू हो जाएगा और सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश भी आम लोगों की तरह होगा। सबरीमाला मंदिर में काफी लंबे समय से इस बात पर प्रतिबंध था कि इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश करना वर्जित होगा, क्योंकि महिलाओं को इस मंदिर में प्रवेश करने के योग्य इसलिए नहीं माना जाता था क्योंकि इस मंदिर में प्रवेश करने से पहले किसी भी दर्शनार्थियों इच्छुक को काफी पवित्रता रखते हुए मंदिर में प्रवेश करना होता था, जिसके लिए तकरीबन 4 महीनों का पवित्र व्रत भी रखने की बात कही जाती है। इसी वजह से सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगी हुई थी, लेकिन पांच जजों की पीठ ने इसे समानता के अधिकार का हवाला देते हुए महिलाओं की सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की निषेधता पर से रोक हटा ली है।

4:1 के अनुपात से आए इस फैसले के विपरीत इंदु मल्होत्रा का कहना था कि या धार्मिक मुद्दे हैं सती प्रथा जैसे मुद्दों के अलावा अदालत के बजाय श्रद्धालुओं को इस बात का निर्णय लेना चाहिए। क्योंकि यह धार्मिक आस्था का मानक है, इंदू मल्होत्रा ने कहा कि यह सिर्फ सबरीमाला मंदिर तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर अन्य जगहों पर भी देखने को मिलेगा।

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