समाज का आइना है युवा और उनके बनाये संगठन

भारत विश्व का सबसे बड़ा हुआ कि जनसंख्या वाला देश है। युवा के अधिक होने का मतलब है सबसे ज्यादा उर्जावान, सीमित संसाधन में भी अधिक परिणाम देने वाले होते हैं। आप जानते हैं कि आजादी की लडाई में भगत सिंह, खुदीराम बोस, बटुकेश्वर दत्त सरीखे युवा नेताओं ने समाज में अन्याय के प्रति संघर्ष कर हम सबके सामने मिशाल कायम की। वहीँ आजादी के उपरांत जेपी के नेतृत्व में छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के बैनर तले युवाओं ने ही महती भूमिका निभाई थी।

आज राजनीति, मीडिया, एवं समाजसेवा में शीर्ष पदों पर इसी आंदोलन से उपजे उस समय के युवा हैं। इन सब के बाद का दौर युवाओं के लिए लगभग थम सा गया था। जिन युवाओं के दिल में देश सेवा का भाव था, उन्हें पार्टी के दुष्चक्र में फंसा दिया गया तो कुछ कुछ उचित मंच ना मिलने या समान विचार वाले युवाओं के संपर्क में नहीं आने से अपने किसी किसी खास क्षेत्र तक ही सीमित होकर रह जाते थे। लेकिन डिजिटल क्रांति ने ना केवल शिक्षा एवं रोजगार का बढ़ाने का काम किया, बल्कि ऐसे विचार वालो लोगों को एक दूसरे संपर्क में लाने का जरिया बना और अपने विचारों एवं सत्कर्मों को समाज के समान प्रस्तुत कर उन्हें भी पुनीत कार्य से जुड़ने की प्रेरणा देता है।

इन्हीं सबके बीच में आपको बताने जा रहा हूं युवाओं के एक ऐसी संगठन के बारे में जो सैकड़ों बच्चों के जुबान पर है। स्लम बस्तियों में पढ़ने वाले बच्चे या वैसे संसाधन विहीन छात्र जिन्हें The Humanity Trust of India से मदद मिली हो। इन्हें याद करने का प्रमुख कारण यह की छात्रों एवं युवाओं के द्वारा बनाये गए इस ट्रस्ट के माध्यम से बच्चों के बीच पुस्तक-कॉपी-कलम और पेंसिल जैसी पाठ्य सामग्रियों का वितरण। ये खुद में चंद इकठ्ठा करते हैं और निकल पड़ते हैं उन बच्चों को मोटीवेट करने और उनके चेहरे पर खुशियां लाने। ये सेमिनार और छोटी-छोटी प्रतियोगिताएं भी करवाते हैं। इस ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी मुसलमान (अध्यक्ष-तौशीफ आलम, सदस्य-मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद कमरुज्जमा, अमनतुल्लाह राही, शादाब मालिक, जिया खान, हैदर अब्बास) होने के बावजूद भी सहयोग करने या मदद पहुंचाने में कोई भेद-भाव नहीं करते कई बार तो विद्रोही के कहने पर मोतिहारी मुजफ्फरपुर और पटना में हिंदू समाज के बच्चों के बीच इनका कार्यक्रम हुआ है और भरपूर सहयोग प्रदान किया हैं। सबको याद होगा, मुजफ्फरपुर जब बाद की त्रासदी से गुजर रहा था तो इन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया से सैकड़ो परिवारों को बाहर निकाला। उन्हें मिनरल वाटर, छोटे बच्चों के लिए दूध और बड़े तथा बुजुर्गों के लिए रोटी-भुजिया, चूड़ा-मीठा, सत्तू। इस प्रकार से लोगों से सहयोग लेकर जरूरतमंदों तक उसे पहुँचाने के लिए इन्होंने जी जान लगा दिया। इसी दौरान जब उन्होंने आज का रिपोर्ट टीम को आमंत्रित किया तो हमारे प्रतिनिधि ने देखा कि कैसे गर्दन तक पानी में जाकर लोगों को मदद पहुंचा रहे थे। इन्हें समाचार पत्रों में छपने या tv पर आने का कोई शौक नहीं, बस अपना काम खामोशी से करते जा रहे हैं। अब ठंड आ गई है तो इनकी टीम कभी यूपी की सड़कों पर निकल पड़ती है और सोये हुए जरूरतमंदों को कम्बल ओढ़ाकर चलती बनती है।

इस तरह की गतिविधि के दौरान जब हरियाणा में “आज का रिपोर्ट” टीम ने मोहम्मद तौशिफ आलम से पूछा कि कब से ऐसा करते आ रहें हैं ? तो उन्होंने जवाब दिया कि विगत 3 सालों से उनके यह काम अनवरत जारी है। इस बार सिर्फ दिल्ली टीम ने मोहम्मद नौशाद, जिया खान और हैदर अब्बास के नेतृत्व में 200 लोगों के बीच कम्बल वितरण की है। ट्रस्ट के युवाओं को देकर बरबस मुंह से निकल जाता है :- जीना भी कैसा जीना, जो खुद के लिए जिया जाए। जीना तो वह है जिसमें, दूसरों के लिए कुछ किया जाए।। सलाम ऐसे युवाओं को, लाल भी, पीला भी और हरा भी सलाम। ऐसे ही युवा और ट्रस्ट बनते हैं युवाओं के प्रेरणास्रोत।
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