45वां विश्व पर्यावरण दिवस, विश्व भर में आयोजित किए जा रहे हैं कार्यक्रम, भारत कर रहा है होस्ट

45वां विश्व पर्यावरण दिवस। वैसे इस दिन को दुनियाभर में मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1972 में की थी लेकिन पहला विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 1974 को मनाया गया था। और इसबार 45वां विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस की शुरूआत पर्यावरण की सुरक्षा और उसके संरक्षण के लिए किया गया था। विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के पीछे यह उद्देश्य है कि, लोगों को इस बारे में जागरूक किया जा सके कि, आखिर क्यों पर्यावरण की सुरक्षा जरूरी है।

आज भारत इस पर्यावरण दिवस को होस्ट कर रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस पर हर साल एक नया थीम होता है। 2018 के विश्व पर्यावरण दिवस की थीम ‘बीट प्लास्टिक पोल्यूशन’ रखी गई है। विश्व पर्यावरण दिवस के इस अवसर पर मंगलवार, 5 जून को भारत की मेजबानी में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों से विश्व समुदाय को अवगत करायेंगे। प्लास्टिक के प्रयोग से मुक्ति की थीम पर आधारित पांच दिवसीय समारोह के अंतिम दिन मोदी पूर्ण अधिवेशन को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन पूरे विश्व में सुना जा सकेगा। मोदी ने हाल ही में अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा था कि, विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी भारत को मिलना जलवायु परिवर्तन संबंधी मुद्दों पर भारत की नेतृत्व क्षमता को विश्व समुदाय द्वारा स्वीकार करने का स्पष्ट संदेश है। इस दौरान उन्होंने देशवासियों से प्लास्टिक के प्रयोग को नकारने की भी अपील की।

प्लास्टिक के दैनिक उपयोग से नदियों में प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है। इसलिए नदियों के संरक्षण में प्लास्टिक की रोकथाम का विशेष महत्व है। मछलियों एवं अन्य छोटे जीवों द्वारा निगले जाने के बाद प्लास्टिक खाद्य श्रंखला में समाविष्ट हो जाता है जो अन्ततः मानव एवं अन्य जीवों के लिए अत्यन्त जहरीला होता है, प्लास्टिक से गुजरने वाले पानी के स्रोत, जलाषयों को विषाक्त करते है, जिसका सीधा प्रभाव सभी जीव-जन्तुओं पर पडता है, प्लास्टिक को खुले में जलाने से उत्पन्न जहरीले सभी जीव जन्तुओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तथा सांस सम्बन्धित बीमारियां उत्पन्न करते है। इसलिए प्लास्टिक के प्रयोग पर रोकथाम हेतु जनमानस को जागरूक करने की भी आवश्यकता है।

इसी कड़ी में आर्ट ऑफ लिविंग एक कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है, जिसका नाम ‘प्रदूषण के खिलाफ आवाज़, ग्रीन एनर्जी की ओर कदम’ है। इस कार्यक्रम में कई नामचीन हस्तियां शामिल होंगी जिसमें आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक एरिक सोलहेम, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन जलवायु परिवर्तन मंत्री महेश शर्मा और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम शामिल है। लेकिन भले ही आज भारत 2018 का पर्यावरण दिवस को होस्ट कर रहा हो लेकिन पूरा देश वायू प्रदूषण और पीने के पानी की कमी से जूझ रहा है।

नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों के दल द्वारा तैयार किए गए रिपोर्ट में कहा गया है कि, यूरोप में जानलेवा लू, अमेरिका में दावानल, आस्ट्रेलिया में भीषण सूखा और मोजाम्बिक, थाईलैंड और पाकिस्तान में प्रलयकारी बाढ़, अभी हाल ही में उत्तर भारत के कई राज्यों के साथ-साथ हिमालय पर स्थित नेपाल में आया भूकंप, उत्तराखण्ड में आई भीषण प्राकृतिक आपदा, जापान के पिछले 140 सालों के इतिहास में आए सबसे भीषण 8.9 की तीव्रता वाले भूकंप की वजह से प्रशांत महासागर में आई सुनामी जैसी 21वीं शताब्दी की आपदाओं ने यह दिखा दिया है कि, मानवता के लिए मौसम का खतरा कितना बड़ा है। वास्तव में आज पूरे विश्व के जलवायु में होने वाले परिवर्तन मनुष्यों के द्वारा ही उत्पन्न किये गये हैं। जिस पृथ्वी का वातावरण कभी पूरे विश्व के लिए वरदान था आज वहीं अभिशाप बनता जा रहा है।

अभी हाल ही में भारत के रमेश अग्रवाल को पर्यावरण के सबसे बड़े पुरस्कार ‘गोल्डमैन प्राइज’ से नवाजा गया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में अंधाधुंध कोयला खनन से निपटने में ग्रामीणों ने मदद की और एक बड़ी कोयला परियोजना को बंद कराया। उनके साथ इस पुरस्कार को पाने वाले अन्य लोगों में पेरु, रूस, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और अमरीका के 6 पर्यावरण कार्यकर्ता शामिल हैं। इससे पहले ग्लोबल वार्मिग के खिलाफ लड़ाई के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के क्लाइमेट पैनल के राजेन्द्र पचौरी और अमेरिका के पूर्व उप राष्ट्रपति अलगोर को शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इन  विश्व की कई जानी-मानी हस्तियों का मानना है कि, अब अंतर्राष्ट्रीय अदालत बनाने का ही रास्ता बचा है, ताकि हमारी गलतियों की सजा अगली पीढ़ी को न झेलनी पड़ी।

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