BHU की घटना से शर्मसार हुआ देश

BHU

मौका था, 22 सितम्बर 2017 को भारत जैसे गणतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी का अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी के भ्रमण का। उनके यात्रा के मार्ग में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) को भी आना था l
जैसा कि आप सभी जानते हैं, लोकसभा चुनाव में एक नारा प्रसिद्द हुआ था ‘बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार’ l इस कारण महिला सुरक्षा पर बीजेपी से संवेदनशीलता की उम्मीद की जा सकती थी l रक्षाबंधन के पवित्र त्यौहार में इस यूनिवर्सिटी के हजारों छात्राओं ने भी राखियाँ माननीय मोदी जी को सप्रेम भेंट किया था l अब जब वे बनारस आ रहे थे तो BHU के भी लड़कियों की भी कुछ समस्याएँ थी, जिसे वे उनसे मिलकर साझा करना चाहती थी l वे हर्षित, उल्लासित एवं संगठित हुई अपने भाई सामान सवा सौ करोड़ लोगों के दिल पर राज करने वाले प्रधानमंत्री जी को अपनी समस्याएं बताने और मांग-पत्र सौंपने के लिएl

देखते-देखते 5-7 सौ लडकियाँ इकट्ठी हो गई l उनकी मांग थी कि हॉस्टल एवं विश्वविद्यालय के रास्ते में पर्याप्त रौशनी एवं CCTV कैमरे की सुविधा, और लफंगों का सामना करने के लिए कुछ सिक्यूरिटी गार्ड हो l ताकि आये दिन होने वाली छेड़छाड़, जींस एवं टॉप में हाथ डालना, हॉस्टल पर पत्थर फेंकने और खिडकियों के समक्ष हस्तमैथुन करने वाले लड़कों कि पहचान कर कार्रवाई की जा सके और अनजान लोगों के अन्दर प्रवेश पर रोक हो l ताकि वे सुरक्षित महसूस कर सकें l आज का रिपोर्टर से बात करते हुए लड़कियों ने बताया की हम किसी पार्टी या संगठन से नहीं, हम विरोध-प्रदर्शन के लिए भी नहीं या बल्कि अपनी बात को अपने प्रतिनिधि तक पहुँचाने के लिए आये हैं l लेकिन शायद सुरक्षा के कारणों से उनका मार्ग बदल दिया गया l ट्विटर पर अपडेट रहने वाले मोदी जी लगातार ट्रेंड कर रहे इन बच्चियों के सवाल से भी अनभिज्ञ रहें l उन्होंने बनारस को क्योटो बनाने का वादा कर वहां से निकल पड़े और उनके आँखों से गिरता आंसू l फिर छात्राओं ने अपने रणनीति में कुछ बदलाव किया और BHU के दरवाजे पर ही धरने पर बैठ गई l
असल में हुआ क्या ? आन्दोलनकारियों के अनुसार एक लड़की बाजार से लौट रही थी, तभी किसी लफंगे ने उसके जींस में हाथ डाल दिया l जब इसकी शिकायत लेकर वह प्रोक्टर के पास गई तो उन्होंने कोई कार्रवाई करने का आश्वासन देने के बजे उसे ही जींस ना पहनने कि सलाह दे डाली l

क्या है BHU प्रशासन की मानसिकता ? जब पहली बार छात्रों का नामांकन होता है तो वार्डन मीटिंग में बोलती है कि परिसर के 1 किमी के दायरे में आप किसी लड़के के साथ नजर नहीं आ सकती l BHU के लाइब्रेरी में जहाँ छात्र 24×7 बैठकर पढ़ सकते थे, वहीँ छात्राओं को 6:30 के बाद हॉस्टल से बाहर निकलने की मनाही थी l उन्हें कपड़ों के लिए बराबर खरी-खोटी सुनाइ जाती थी l ये उनके समानता के अधिकार का हनन था, इसके लिए उन्होंने आवेदन दिया, हस्ताक्षर अभियान चलाये l लेकिन जिद्दी प्रशासन के सामने उनकी एक न चली और नतीजा सिफार ही रहा l
इन सब परिस्थितयों से परेशान होकर जब छात्राएं भूख हड़ताल पर बैठ गई तो प्रशासन ने भी इसे बलपूर्वक दबाने के लिए कमर कस लिया l जहाँ प्रशासन को इनकी बात मांगकर उनके आन्दोलन को अविलम्ब ख़त्म करवाना था, उसके जगह 1000 पुलिसकर्मी और 500 पिएसी के जवानों को बुला लियाl फिर कुछ ही देर में हवाई फायरिंग, ताबड़-तोड़ लाठियां टूटनी शुरू हो गई l आन्दोलन स्थल और हॉस्टल से खीँच-खीँच कर लड़कों एवं लड़कियों को बिना महिला पुलिस की उपस्थिति में पीटा गया l मौके पर अमर उजाला के संवाददाता धीरेन्द्र को भी गंभीर चोटें आई है l अगले दिन परिसर में हॉस्टल का फर्नीचर, जली गाड़ियाँ एवं खून के धब्बे आसानी से देखे जा सकते थे l

आखिर मध्य रात्रि को ऐसा क्या आदेश हुआ की इनके ऊपर आतंकवादियों से भी ज्यादा बर्बर व्यवहार करना पड़ा, यह संशय का विषय बना हुआ है l लड़कों का छात्रावास तो खाली हो चुका है और लड़कियों के भी हॉस्टल को भी लगभग खाली कराया जा चुका है l दशहरे की छुट्टियाँ पहले ही दे दी गई है l वाराणसी के एसपी ने कहा है की 1000 छात्रों पर FIR की पुष्टि की और विडियो फुटेज के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही l लेकिन छेड़खानी करने वाले लड़के के खिलाफ किसी प्रकार के FIR होने सम्बन्धी बात पूछे जाने पर उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की l

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इस मामले में मीडिया की भूमिका पर भी एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है l आप कई समाचार पत्रों के शीर्षक देखेंगे तो ऐसा प्रतीत होगा कि सारी गलती लड़कियों की ही है l ऐसे में उनकी प्रासंगिता पर पाठकों का प्रश्न चिन्ह खड़ा करना लाजिमी है l इस घटना को देखने के बाद हर संवेदनशील व्यक्ति न सिर्फ फेसबुक पर बल्कि सड़क पर उतरकर भी उनके आन्दोलन का नैतिक समर्थन दिया है l इसके बाद के आन्दोलनों में राज बब्बर और राजेश मिश्र जैसे नेता आकर अपना समर्थन दे चुके हैं l JNU के छात्र संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल उन्हें समर्थन देने के लिए आया लेकिन उन्होंने समर्थन नहीं लिया और बाहर से समर्थन देने की बात कही l इसके साथ ही पुरे देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र संगठन, विभिन राजनितिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा जुलुस, प्रदर्शन एवं पुतला दहन कर अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं l

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