सर्व शिक्षा अभियान ने लूटा दिए 8 लाख 33 हजार, हजम कर गए हेडमास्टर!

सर्व शिक्षा अभियान

मुज़: सरकारी राशि का दुरुपयोग किस प्रकार होता है यह शिक्षा विभाग कर दिखाया है। शिक्षक जिनपर अभिभावक सहित समाज के सभी वर्गों उनका सम्मान करते हैं लेकिन जिस तरह से शिक्षक पैसे की खातिर घोटाला पर घोटाला कर रहे हैं इससे लोगों का विश्वास घटता जा रहा है।

●उत्प्रेरण केंद्र के संचालन में भारी घोटाला 8 लाख 33 हजार:

मामला उत्प्रेरण केंद्र के संचालन में 8 लाख 33 हजार रुपए का घोटाला से संबंधित है। मध्य विद्यालय कटेसर सकरा, मध्य विद्यालय बरकागांव मड़वन एवं मध्य विद्यालय शरफुद्दीनपुर के शिक्षकों ने मिलकर किया है घोटाला, जिसके लिए सीधे तौर पर सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय मुजफ्फरपुर जिम्मेवार है।

बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जो प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करना सभी बच्चों का मौलिक अधिकार है जिसके पूर्ति के लिए बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 पारित किया गया जिसके तहत 6 से 14 आयु वर्ग तक के बच्चे को प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित कराने का जिम्मेवारी राज्य सरकार की है जिसके तहत एक उत्प्रेरण केंद्र की स्थापना कर बच्चों के नि:शुल्क पठन-पाठन,भोजन की व्यवस्था प्रखण्ड को इकाई मानकर करना है।

● नहीं हुआ विद्यालय द्वारा 5लाख 70 लाख का समायोजन, निगल गए 3 लाख 80 हजार

वर्ष 2014-15 में 500 बच्चे विद्यालय से बाहर पाए गए थे जिन्हें विशेष आवासीय प्रशिक्षण दिया जाना था जिसके लिए 10 उत्प्रेरण केंद्र के संचालन हेतु सकरा प्रखण्ड के मध्य विद्यालय कटेसर (विशेष आवासीय प्रशिक्षण) को चयनित किया गया था। विद्यालय में केंद्र संचालन में भारी अनियमितता पाई गई। विद्यालय को उत्प्रेरण केंद्र संचालन हेतु नौ माह के लिए 7 लाख 50 हजार का बजट बनाया गया। जबकि सर्व शिक्षा अभियान में 11लाख 39 हजार रुपया का अधिक भुगतान कर दिया। उत्प्रेरण केंद्र नौ से अधिक समय तक चलता रहा। जबकि माह में एक बार जिला के द्वारा अनुश्रवण अनुसमर्थन एवं मूल्यांकन कराया जाना था। विद्यालय को दी गई राशि 11 लाख 30 हजार में से 5 लाख 60 हजार रू० का ही समायोजन किया गया था।

●4 लाख 30हजार हजम!

सकरा के बाद मरवन प्रखंड के मध्य विद्यालय बरकागांव द्वारा इससे भी बड़ा घोटाला किया गया जिस की राशि 4लाख 30 हजार रू० है इसके अलावे दी गई राशि में से चार लाख रूपय का समायोजन नहीं किया गया। इस विद्यालय के द्वारा उत्प्रेरण केंद्र के संचालन के लिए कुल 9 लाख 30 हजार रू० दिया गया जिसमें से मात्र 5 लाख 30 हजार रुपए का ही समायोजन किया गया।

● बंद योजना में भी डीपीओ ने बहाए सरकारी राशि!

बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था लेकिन मुख्यधारा से नहीं जोड़े जाने के कारण इस पर किया गया सारा खर्चा बेकार हो गया। सर्व शिक्षा अभियान भी आंख बंद करके अधिक राशि काबैंड भुगतान करता रहा। विद्यालय के द्वारा अधिक समय तक उत्प्रेरण केंद्र का संचालन पैसे के लोभ में किया गया जिस का संचालन अवधि छह माह के लिए था उसे 11 माह तक संचालन किया गया लेकिन बच्चों के मूल्यांकन से संबंधित कोई भी प्रमाण संचिका में नहीं था इसके अलावे मुख्यधारा से जोड़ने का भी कोई प्रमाण नहीं दिखाया गया अर्थात इस बड़े घोटाले में प्रधानाध्यापक और सर्व शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी भी भी संलिप्त है।

इसके अलावा बोचहां प्रखंड के मध्य विद्यालय सरफुद्दीन पुर (विशेष आवासीय विद्यालय) का भी हाल कुछ अजब सा दिखा। इस विद्यालय में 23हजार 4 सौ रुपए का अधिक भुगतान ले लिया और सर्व शिक्षा अभियान में बड़ी आसानी से भुगतान कर दिया।

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