अभ्यानंद सुपर-30 का रौशन सितारा ‘शिवम’

ज्ञान के समागम और निर्वाण नगरी बिहार आज होनहारों से भरी पड़ी है। आज देश दुनिया के हर कोने में कोई ना कोई ऐसी नामचीन हस्ती जरूर है जो बिहार से वास्ता रखती है, क्योंकि बिहार की खासियत ही है होनहारों को तैयार करना और उन्हें मंजिल तक पहुंचाना। इसी कड़ी में एक पहल आज से कुछ सालों पहले अभ्यानंद सुपर-30 के द्वारा की गई थी जिसने आज न जाने कितनी छिपी प्रतिभाओं को दिए की रोशनी से उठा कर उन्हें आसमान के सूर्य की रोशनी से रूबरू करवाया है। इसी प्रयास में एक बार फिर अभ्यानंद सुपर-30 से शिवम सौरभ नाम के छात्र ने आईआईटी जेईई में सफलता प्राप्त की है तो चलिए जानते हैं शिवम सौरभ की कहानी…..।

प्रारंभिक पड़ाव – 

शिवम सौरभ बिहार राज्य की उन प्रतिभाओं में से एक थे जिन्होंने सही समय पर अभ्यानंद सुपर-30 की ओर कदम बढ़ाए। शिवम बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में स्थित बड़ी संगत, हॉस्पिटल मोड़, के पास रहते हैं। शिवम के पिता गणेश कुमार वर्मा और मां मंजू देवी का प्यार दुलार शिवम को खूब मिला, क्योंकि शिवम घर में सबसे छोटे हैं। शिवम कुल पांच भाई बहन हैं। तीन बहनों और दो भाई में शिवम को ज्यादा परेशानियां नहीं उठानी पड़ती थी। शिवम के परिवार की आमदनी का स्रोत एक मेडिकल स्टोर है जो घर से कुछ दूरी पर स्थित है, और यह मेडिकल स्टोर शिवम के पिताजी की देखरेख में चलता है। शिवम की प्रारंभिक शिक्षा दयानंद एंग्लो वैदिक पब्लिक स्कूल से शुरू हुई जहां से उन्होंने हाईस्कूल किया उसके बाद इंटर की पढ़ाई उन्होंने एस एन सिन्हा कॉलेज जहानाबाद से पूरी की। बिहार बोर्ड से दसवीं के परीक्षा पास करने के बाद शिवम के भैया ने अभ्यानंद सुपर-30 का जिक्र किया और शिवम बताते हैं कि रविवार के दिन जाकर उन्होंने टेस्ट दिया हालांकि उन्हें टेस्ट देने से पहले थोड़ी घबराहट हुई लेकिन उनका चयन सुपर-30 में हो गया।

“दौर था नया नया नया रास्ते थे नए नए

बस चलते जाना था, चलते जाना था”

कब जारी हुआ अभयानंद सुपर-30 का सफर – 

शिवम बताते हैं कि अभ्यानंद सुपर-30 में पढ़ाई का तरीका बेहद शानदार रहा। किसी भी विषय के बारे में तह तक जाकर शुरुआत की जाती थी, ताकि विषयों को समझने में आसानी हो। शिवम ने बताया कि सभी अध्यापकों की अपनी विषय संबंधी खूबी के कारण पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आई। एक दिन शिवम को लगा कि शायद उनके बस में आईआईटी-जेईई नहीं है, और उनका मनोबल टूटने लगा। फिर अभ्यानंद सर ने उन्हें डांट तो लगाई ही साथ ही साथ अच्छी तरीके से समझाया कि कैसे तुम विजय पथ पर आगे बढ़ सकते हो। वहीं, शिवम को रहने खाने की व्यवस्था बिल्कुल अच्छे से मिल रही थी क्योंकि सुपर-30 में पढ़ रहे छात्रों के लिए एडी सिंह के द्वारा चलाए जा रहे ट्रस्ट उर्मिला सिंह सिन्हा प्रतापधारी फाउंडेशन की ओर से सुपर थर्टी में पढ़ने वाले सभी छात्रों को आज भी सभी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। फाउंडेशन को शुरू करने वाले एडी सिंह ने अपने माता पिता की याद में इस फाउंडेशन की शुरुआत की थी। एडी सिंह का विदेशों में और भारत में भी बिज़नेस चलता है लेकिन प्रतिभाओं की मदद के लिए वह हमेशा तैयार खड़े रहते हैं शिवम कहते हैं कि समाज को AD सिंह जैसे व्यक्तियों की समाज को बहुत जरूरत है खासकर बिहार को बहुत ज्यादा।

प्रतिदिन टेस्ट की वजह से आ रहा था निखार – 

परीक्षा की तैयारी को लेकर शिवम का कहना है कि हर दिन टेस्ट होने की वजह से ज्यादा मुश्किल नहीं हुई और इससे आकलन भी होता था कि मेरी मौजूदा मेहनत कैसी चल रही है?फिर भी मेरा स्थान टेस्ट में टॉप-10 से टॉप-15 तक ही सीमित था। शिवम ने कहा कि रहने और खाने की व्यवस्था भी चाक-चौबंद थी। उर्मिला सिंह प्रताप धारी सिन्हा फाउंडेशन को धन्यवाद देते हुए शिवम ने कहा कि खाने की व्यवस्था से लेकर बिजली-पानी आदि की कभी भी समस्या नहीं हुई। शिवम ने जब जेईई-मेन का एग्जाम दिया तो उनकी ऑल इंडिया रैंक 7546 थी लेकिन जब उन्होंने जेईई एडवांस दिया तो उनकी रैंक 14483 पहुंच गई। दरअसल शिवम इस बात के लिए खुद की लापरवाही मानते हैं। शिवम का कहना है कि जेईई मेन की रैंक के लिए उन्होंने कोचिंग में पढ़ाए गए स्टडी मटेरियल और गाइडेंस को ध्यान में रखकर ही आसानी से सफलता प्राप्त कर ली। लेकिन जब  JEE- Advance की बात आई तो उन्होंने पढ़ाई से मन हटा लिया, इस अतिउत्साह में कि यह तो आसानी से निकल जाएगा। हालांकि वह पास तो हो गए पर रैंक को लेकर उनको अभी भी अपनी गलती का एहसास होता है। शिवम ने आज का रिपोर्टर से बातचीत के दौरान यह भी बताया कि उनके पिता का सपना था कि वह वकील बनें, लेकिन इंजीनियर बनने के बाद उनके पिता की चाहत है कि वह UPSC के एग्जाम में बैठें। ख्वाहिशों के समंदर को शिवम भी पार करना चाहते हैं फिलहाल शिवम IIT भुवनेश्वर में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं।

“हौंसला कम न होगा, तेरा तूफानों के सामने,
मेहनत को इबादत में बदल कर तो देख,”

गुरु के द्वारा दिए गए ज्ञान के कर्जदार रहेंगे शिवम – 

शिवम कहते हैं कि आज वह जो भी हैं, वह अभयानंद सुपर-30 की वजह से हैं और आगे जो भी बनेंगे उसके लिए भी वह अपने गुरुओं के हमेशा शुक्रगुजार रहेंगे।  अभ्यानंद सुपर-30 में पढ़ रहे छात्रों की खानपान एवं रहन सहन की उत्तम व्यवस्था कराने के लिए शिवम, उर्मिला सिंह प्रताप धारी सिन्हा फाउंडेशन के एवं इस फाउंडेशन के ट्रस्टी एडी सिंह के सदैव आभारी रहेंगे।

आज का रिपोर्टर बिहार में शिक्षा व्यवस्था की ऐसी प्रतिभाओं को निखारने के लिए और उन्हें तैयार करने के लिए अथक प्रयास करने वाले अभ्यानंद सुपर-30 और अभयानंद सुपर-30 में पढ़ रहे छात्रों को सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु उर्मिला सिंह सिन्हा प्रताप धारी फाउंडेशन एवं ट्रस्टी एडी सिंह को ऐसे कार्यों के लिए शुभकामनाएं देती है जो बिहार के शैक्षिक विकास में अप्रतिम योगदान दे रहे हैं।

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