नीतीश के दलित सम्मेलन में टोला सेवकों ने जमकर काटा बवाल

आने वाले लोकसभा चुनाव में दलितों का वोट पाने के लिए आज नीतीश कुमार ने दलित सम्मेलन रचा कर उनका मन लुभाने की कोशिश की है। जब यह दलित सम्मेलन चल रहा था तब बीच में से टोला सेमको ने कार्यक्रम में बाधा लाने की कोशिश की और अपनी मांग को लेकर कार्यक्रम के बीच से ही नारे लगाने शुरू कर दिए।

दलित सम्मेलन में टोला सेवकों की मांग-

एसके मेमोरियल हॉल में जहां नीतीश कुमार दलितों का वोट पाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर टोला सेवकों ने उनका यह कार्यक्रम खराब करने का जिम्मा लिया। कार्यक्रम के बीच में ही टोला सेवक उठे और अपनी मांगों को लेकर आवाज लगाने लगे। हालांकि स्टेज से जब आश्वासन मिला कि उनकी बातों को सुना जाएगा जिसके बाद वे लोग शांत हुए। दरअसल, जेडीयू द्वारा एसकेएम में ‘दलित सम्मेलन’ का आयोजन किया गया था। स्टेज से कार्यक्रम को मुख्यमंत्री संबोधित कर रहे थे। इस दौरान नीतीश कुमार ने पार्टी द्वारा किए गए कार्यों को बताएं। उनके विकास के लिए पार्टी पहले भी तत्पर थी और भी उनके विकास के लिए सोच रही है। नीतीश कुमार ने कहा कि ‘हमने पिछड़े वर्ग के लिए छात्रावास बनाए हैं।’ छात्रावास के अलावा दलितों के लिए सरकार कई कार्य कर रही है। दरअसल, बिहार में 18.44 फीसद दलित वोटर हैं। लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं, जेडीयू ने पटना के एसकेएम में ‘दलित सम्मेलन’ का आयोजन किया।

आपको बता दें कि इस कार्यक्रम से पहले पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में वित्त आयोग की टीम के साथ बिहार सरकार की अहम बैठक भी हुई थी। इस दौरान सीएम नीतीश कुमार ने वित्त आयोग के सामने फिर से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग दुहराई है। वित्त आयोग के साथ हो रही यह बैठक तीन घंटे तक चली।

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