पुनाईचक स्लम के बच्चों की बदल रही है जिंदगी…

स्लम के बच्चों

शुक्रवार का दिन था, बच्चे मुस्कुरा रहे थे और काफी खुश लग रहे थे। उनकी आंखों में, वहाँ जलती बिजली के उस LED बल्ब से कही ज्यादा चमक थी। ऐसा सुनते आया हूँ कि बच्चे भगवान का रुप होते हैं। अतः उनके चेहरे पर खुशी लाना सात धामों की यात्रा करने के बराबर होता है। वैसे भी खुशनुमा माहौल हर अच्छे इंसान को मोहित करता है। कभी सचिवालय के समक्ष पुनाईचक के स्लम एरिया के यह बच्चे शिक्षा से मरहूम हुआ करते थे। कभी-कभी कहते हैं, सर पहले हमें पढ़ाई बोरिंग लगती थी। फिर हिमांशु सर, रमन सर और विद्रोही सर आये और कुछ अच्छी कहानियां सुनाई, कुछ खेल खेलवाये और इसी बीच कुछ कोर्स की किताबें भी पढ़ा देते थे। अब जब भी कुछ नया चीज सीख कर स्कूल जाते हैं तो साथ पढ़ने वाले बच्चे पूछते हैं कैसे सीखे, कहां पढ़ते हो और सर कितना पैसा लेते हैं। हम उन्हें बताते हैं कि 3 सर पढ़ाने आते हैं, वह भी बिल्कुल फ्री तो किसी को विश्वास ही नहीं होता। लेकिन हमें बड़ा गर्व होता है जब स्कूल के शिक्षक भी अब हमें दुलार देते हैं, अब तो हम लोग 2-3 घंटे सेल्फ स्टडी करके इस ‘विद्रोही क्लासेज‘ का होमवर्क भी बनाते हैं। सच पूछिये तो बड़ा मजा आता है।

ये कहानी किसी एक बच्चे की नहीं है, उस स्लम बस्ती का हर व्यक्ति इन शिक्षकों के नाम से परिचित है और परिचित है पटना के शिक्षा जगत के कुछ गणमान्य लोग। जब इसकी शुरुआत हुई थी तो जमीन पर दरी, बोरा बिछाकर तीस-चालीस बच्चे बैठकर पढ़ते थे। एक अदद व्हाइट बोर्ड भी नहीं था। सबसे पहले आईआईटीयन तपस्या के निदेशक प्रशांत चौबे ने इस संस्था के संचालक विद्रोही जी के माध्यम से इसके लिए आर्थिक सहायता प्रदान की। फिर तो बच्चों को पढ़ाना आसान हो गया। परंतु उनमें कुछ मोटिवेशन का अभाव था। इसीलिए माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व फैकल्टी, शिक्षाविद् एवं पत्रकार श्री शंभू कुमार सिंह, गंगा मुक्ति आंदोलन के नेता श्री अनिल प्रकाश, राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त द वायर के प्रतिनिधि, नन एडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारीगण, बिहार विकास मिशन के वरीय अधिकारी, फोटोग्राफी के शौकीन एवं शिक्षा से जुड़े हुए समाजसेवी निवेश कुमार, आइकॉन पब्लिक स्कूल के निदेशक मुकेश कुमार एवं द ह्यूमैनिटी ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मोहम्मद तौसीफ आलम समय समय पर आकर इन बच्चों के बीच में पाठ्य सामग्री का वितरण एवं मोटिवेशन करते रहें हैं। ये सारे आगंतुक अपने अनुभव इन बच्चों से साझा करते है, तो बच्चे रोमांचित हो उठते है और सुनहरे भविष्य की उम्मीदे जीवंत हो उठती है।

कुछ दिनों पूर्व ही श्री मुकेश कुमार जी के प्रयास से नन एडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के द्वारा इस बस्ती में जरूरतमंद  बुजुर्गों को हाड़ कंपा देने वाली इस ठंड से बचने के लिए कंबल का वितरण भी किया गया था।

शुरुआत में बच्चे नीचे बोरा बिछाकर बैठकर पढ़ते थे, कुछ महीनों बाद ठंड पड़ने के कारण मोहल्लेवासियों ने दो बेंच दिया, लेकिन यह भी 40 बच्चों के लिए अपर्याप्त था, लेकिन बच्चों के उत्साह और ललक में कोई कमी नही आई थी। कुछ दिनों पहले श्री निवेश कुमार जब पाठ्य सामग्री बांटने आए थे, उन्होंने उस उत्साह और ललक के साथ उस पीड़ा को भी महसूस किया और आज उनके अथक प्रयास से मुकेश कुमार जी द्वारा 6 बेंच एवं लगभग 100 किताबे इस संस्था को उपलब्ध कराया गया। बच्चे इन्हें देखकर बहुत खुश थे। कुछ छात्राओं ने पढ़ाई के साथ-साथ परिसर के साफ-सफाई की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी ले लिया है, यह उनके महान चारित्रिक खूबियों को दर्शाती है जो कि भविष्य में विशाल हृदय वाली स्त्री का रूप ले लेगा। छात्रा मानसी बोल रही थी कि सर इतना महंगा किताब कभी छुए नहीं थे, आज आप लोगों की वजह से हमें पढ़ने को मिलेगा। इस बात की खुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था।

आज इन बच्चों के बीच में आईआईटीयन तपस्या के निदेशक श्री प्रशांत चौबे मौजूद थे। ये ऐसे शिक्षक हैं जिनके छात्र आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 24, 36 और 48 वां स्थान हासिल कर चुके हैं। उन्होंने बच्चों को मोटिवेट करते हुए कहा कि पढ़ाई को यदि अपना शौक बना लेंगे तो सवालों को हल करना आसान हो जाएगा। शिक्षकों से बात करते हुए उन्होंने गौर से बगल में एक चमचमाती हुई सारी सुविधाओं से युक्त इंसान की बनाई हुई मूर्ति के लिए मंदिर है तो दूसरी तरफ ईश्वर के द्वारा बनाई गई मूरत के लिए शिक्षा के इस मंदिर में संसाधनों का अभाव है। समाज की अजीब विडम्बना है। लेकिन आप जैसे युवा इन बच्चों, समाज एवं देश के उज्जवल भविष्य की उम्मीद की एक किरण है, उसे हमेशा जलाए रखिए। हम आपके सहयोग को सदैव तत्पर रहेंगे।

पुस्तक वितरण के दौरान उत्साह एवं खुशी में बच्चों की आवाज़ से कुछ माता-पिता भी कौतुहलवश आ गए और क्लास के बाद सभी को छोड़ने मुख्य सड़क तक साथ आये। इस दौरान बात-चीत के संदर्भ में उन्होंने बताया कि स्थानीय पुलिस स्लम को खाली करने के लिए कह कर गयी है। उन्होंने आगे कहा कि “कहा जाएंगे अब, जब जन्म यहाँ, कर्म यहाँ तो मरण भी यहीं होना चाहिए न…” इस बात की चिंता उनके चेहरे पर ठंड के डर के साथ साफ दिखता प्रतीत हुआ।

अंत में कार्यक्रम का समापन बच्चों के बीच में पुस्तक का वितरण कर किया गया। मौके पर हिमांशु सर, रमन सर, विद्रोही सर एवं आज का रिपोर्टर के प्रतिनिधि कौशल जी मौजूद रहे। बच्चों के अभिभावकों ने भी सभी को कोटि कोटि धन्यवाद दिया ।

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