बिहारी बेरोजगार: विद्रोह भी नही कर रहा ??

बिहार नाम मे ही एक बड़ी पहचान छुपी है। यहां बुद्ध से लेकर सम्पूर्ण क्रांति तक अनेको गाथाएं जो आसानी से सीखा जाती हैं कि जीवन क्या है? हक़ क्या है? और हक़ न मिले तो विद्रोह क्या है? और आज इस राज्य के सबसे बड़े हिस्सेदार युवा के हक़ को राजनीति दबाए बैठी है और हम शांत बैठे व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी में जोके और राष्ट्रवाद हिंदूवाद के जुमले फारवर्ड कर के कामगार होने का अनुभव कर के खुश हैं। और सरकार भी अनुदानों और ऋणों के लॉलीपॉप वाले जुमले थमहाकर अपना खेल खेल रही है।

बिहार में एक रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में ही करीब 10 लाख के करीब पद रिक्त हैं और अगर बढ़े छात्रों के अनुसार पदों का अगर फिर से सृजन किया जाए तो खाली पदों की संख्या 20 से 25 लाख में भी पहुंच सकता है लेकिन सुशासन बाबू ने जो अनुदान वाला जुमला उछाला है लग गए हैं सभी बटोरने में किन्ही को एहसास भी नही की हमारे हक किन जुमलों से मारे जा रहे।

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