मुजफ्फरपुर बालिका यातना गृह काण्ड – सीएम नीतीश कुमार ने चुप्पी तोड़कर नाकामी को किया स्वीकार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को मुजफ्फरपुर के बालिका यातना गृह पर अपनी चुप्पी तोड़ दी। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए, हम सभी इस तरह की घटना से स्वयं शर्मिंदा हैं। इस मामले में सीबीआई जांच चल रही है, कोई भी दोषी बक्शा नहीं जाएगा।

बालिका गृह में यौन उत्पीड़न के मामले के सामने आने के बाद, मामले में दैनिक जांच चल रही है। कुछ दिन पहले, घर से बालिका  के गायब होने का मामला सुर्खियों में था, लेकिन आगे जांच बढ़ी, तो लापता लड़कियों की संख्या छह हो गई। मारपीट से एक की मौत के बाद शव को बालिका गृह परिसर में ही दफना दिये जाने का बयान पीड़िताओं की ओर से आने के बाद शुरू हुई जांच के क्रम में इन आधा दर्जन लड़कियों के गायब होने का मामला भी सामने आया है| वर्ष 2013 से 2018 के बीच ये लड़िकयां बालिका गृह से गायब हुईं।

ताज्जुब की बात तो यह है कि इस मामले में पुलिस के पास अतीत का कोई रिकॉर्ड तक मौजूद नहीं है| यानी शासन-प्रशासन कुम्भकरण की नींद में खोया सा था| वह तो काफी विवाद के बाद राज्य सरकार ने इस घटना की सीबीआई जांच की सिफारिश की। जिसके बाद अब सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। इस मामले में अब तक सीबीआई ने कई लोगों ने पूछताछ भी की है।

आपको अवगत करा दें कि इस मामले में विपक्षी दल लगातार सरकार को शामिल कर रहे हैं, यहां तक ​​कि विपक्ष के नेता और पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस मामले के बारे में बहुत मुखर हैं और नीतीश कुमार पर  हमलावर हैं। वे सरकार पर इस घटना से जुड़े लोगों पर बचाने के लिए लगातार आरोप लगा रहे हैं। अब तक मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं दिया था|

शनिवार को पटना में सत्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने इस घटना के बारे में कहा कि ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए, हम सभी शर्मिंदा हैं और अपराधी किसी भी कीमत पर छोड़े नहीं जायेंगे।

चुनाव नज़दीक आता देख सीएम नीतीश कुमार अपने तिलिस्म की गुफाओं से बाहर आते दिख रहे है क्योंकि राज्य की बालिकाओं के मसीहा रहे नीतीश बाबू की छवि पर बट्टा लग चूका है जिस को हटाने हेतु सीएम महोदय आत्मग्लानि और अफ़सोस की तपिश कर रहे है लेकिन जनता जागरूक है और उसे बस एक्शन चाहिए शब्द नहीं| उम्मीद है राज्य सरकार बालिकाओं को न्याय दिलाएगी| एक तो बात तो साफ़ हो गई कि देर से ही सही नीतीश बाबू जब चारो ओर से घिरे दिखे तो अपनी नाकामयाबी को शर्मिंदगी की आड़ में स्वीकार कर ही लिया यानी सीधा अर्थ यह कि राज्य में बालिका सुरक्षा की कोई भी गारंटी नहीं है|

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