मुजफ्फरपुर बालिका यातना गृह काण्ड : स्वाति मालीवाल ने सीएम नीतीश को दिखाया आइना , पूछा – खुद की बेटी होती तो भी चुप रहते ?

बिहार मुजफ्फरपुर बालिका यातना गृह काण्ड दिन पर दिन तूल ही पकड़ता जा रहा है जिससे और शर्मिंदगी के चलती अपनी गलती मैंने के बाद भी नीतीश कुमार को सवालो से दो-चार होना पड़ रहा है| अब इस मामले में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालिवाल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखकर लक्षित करते हुए उन्हें आइना दिखाया है| पत्र में, मालिवाल ने इस मुद्दे के बारे में नीतीश कुमार से सवाल उठाया है।

दो पन्नो में लिखे गए इस पत्र में, स्वाती ने नीतीश से पूछा, “महोदय, आपके पास कोई बेटी नहीं है लेकिन मैं आपसे पूछना चाहती हूं कि यहां तक ​​कि अगर  उन 34 लड़कियां में आपकी बेटी भी होती तब भी आपको किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई करते न बनता ? इस चुप रहने के कृत के कारण इस देश की लाखों महिलाओं और बच्चों के सामने आपने अपनी इज़्ज़त खो दी है”|

पूरा पत्र इस प्रकार है : –

नीतीश कुमार जी,

सर, आज फिर मैं रात में ठीक तरह से नहीं सो पाई। मुजफ्फरपुर के बालिका गृह की बेटियों की चीखें मुझे पिछले कई दिनों से सोने नहीं दे रहीं। उनके दर्द के सामने पूरे देश का सिर शर्म से झुक गया है। मैं चाहकर भी उस दर्द को अपने आप से अलग नहीं कर पा रही हूं और इसलिए आपको यह खत लिख रही हूं। मैं जानती हूं कि बिहार मेरे कार्यक्षेत्र में नहीं आता है, देश की एक महिला होने के नाते मैं यह खत लिख रही हूं। आशा है आप मेरा यह खत जरूर पढ़ेंगे।

इस बालिका गृह की यह भयावह स्थिति अप्रैल 2018 में TISS की एक रिपोर्ट में उजागर हुई। पर सर मुझे बहुत दुख है कि आपकी सरकार ने तो महीनों तक इस रिपोर्ट में कोई एक्शन नहीं लिया, बल्कि बृजेश ठाकुर नाम के हैवान के एनजीओ को और प्रोजेक्ट दे दिए। जब मीडिया द्वारा पूरी घटना सामने आई, तब भी आप कोई कड़ा फैसला लेते हुए नहीं नजर आए। बस जब आपने बहुत दबाव महसूस किया तो मामला सीबीआई को सौंपकर अपना पीछा छुड़ा लिया। आपकी सरकार के एक भी मंत्री और संतरी पर अब तक कोई एक्शन नहीं हुआ है।

इसका नतीजा है जब ब्रजेश ठाकुर मीडिया के दबाव में कई दिन बाद अरेस्ट हुआ तो उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट थी। वो एक बड़ा बिल्डर है और उसके चेहरे की हंसी उसकी राजनीतिक रसूख को पूरी तरह से दर्शाती है। शायद उसे पता है कि यह खोखला सिस्टम उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

सर आपकी कोई बेटी नहीं है पर मैं आपसे पूछना चाहती हूं कि अगर उन 34 लड़कियों में से एक भी आपकी बेटी होती तो भी आप तब भी किसी के खिलाफ कोई एक्शन हीं लेते? आपके इस एक कर्म से आपने इस देश की करोड़ों महिलाओं और बच्चियों में अपनी इज्जत खोई है।

मैं बार बार ये सोच कर परेशान हो रही हूं कि लड़कियों का अब क्या हाल है? जिस सरकार से उन्हें न्याय नहीं मिला, क्या वह सरकार उनका अब ख्याल रखने में सक्षम है? क्या वो लड़कियां अभी भी किसी बालिका गृह में घुट रही हैं या कम से कम अब उनके बेहतर भविष्य़ के लिए कोई काम हो रहा है? क्या उनको एक अच्छे स्कूल भेजा जाना शुरू हो गया है? क्या उनके खाने-पीने, खेलने कूदने के बेहतर प्रबंध हुए हैं? क्या उनको अपने भयानक कल से लड़ने के लिए मनोचिकित्सक की मदद दी जा रही है? क्या उनका स्वास्थ्य अब बेहतर है? क्या उनके आसपास का वातारण अब सुरक्षित और खुशहाल है? क्या उनको अपने बयान बदलने के लिए कोई दबाव तो नहीं बना रहा?

ये सवाल मेरे जेहन में बार-बार घूम रहे हैं। मैं आपसे गुजारिश करना चाहूंगी कि आप यह बताएं कि बिहार सरकार इन लड़िकयों के हित में क्या कदम उठा रही हैं? उन लड़कियों के बेहतर कल के लिए मैं और हमारा पूरा आयोग अपनी पूरी जान लगाने के लिए तैयार हैं और हर मदद के लिए तैयार हैं। देश में हम जैसे लाखों लोग उन बच्चियों की मदद करना चाहते हैं।

सर, साल 2008 में कोसी नदी में बाढ़ आई थी। मैं बाढ़ राहत के काम के लिए अकेल बिहार आई थी और कई महीने तक दूर दराज के जिलों में रहकर महिलाओं की मदद की थी। तब आपके अच्छे काम के बारे में काफी सुना था। इन बच्चियों को अगर आप अपनी बच्चियां मान लें और दोषियों के खिलाफ एक्शन लें और उन लड़कियों के हित में अपनी पूरी ऊर्जा लगा दें तो शायद आज इस कलंक से आप थोड़ा बच जाएं। आपके जवाब का तत्परता से इंतजार करूंगी|

 

नीतीश कुमार वास्तव में इस पत्र को पढ़ें भी होंगे तो उनको यह पत्र अंदर से झकझोर गया होगा कि कैसे वह अब एक बालिका से नज़रे मिला पाएंगे , कैसे उसे आशीर्वाद दे पाएंगे ! बस किया तो यही जा सकता है कि वह कोई ठोस कदम उठाकर न्याय करवाएं|

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