मुजफ्फरपुर बालिका “यातना” गृह काण्ड की दर्दनाक कहानी वहीँ की लड़कियों की ज़ुबानी

मुजफ्फरपुर बलिका घर में यतीम और उत्पीड़ित बच्चों पर हुए ज़ुल्म को पढ़ने के बाद  किसी के भी रौंगटे खड़े हो जायेंगे। पुलिस की पर्यवेक्षण रिपोर्ट में लड़कियों द्वारा किए गए खुलासे किसी भी सभ्य समाज पर दाग हैं। सात साल की लड़की के भोजन में, नशीली दवा को मिश्रित किया गया था। सवेरे वह जब उठती है तो पूरा शरीर दर्द से टूटता रहता था। खाना मांगने पर गर्म छोलनी से दाग दिया जाता था। वहां की कर्मचारी किरण आंटी के कहने पर दूसरे कमरे में ले जाकर गलत काम कराया जाता था। ऐसा करने से मना करने पर लड़कियों के शरीर पर खौलता पानी फेंक दिया जाता था।

ब्रजेश सर – दरिंदगी की हदें पार करने वाला आदमखोर 

बालिका गृह का संचालक ‘ब्राजेश सर’ ने साड़ी सीमा पार कर दी थी। कभी छत पर ले जाते तो कभी अपने कमरे में ले जाना चाहते थे। सभी आंटी लोग ने कहा कि किसी भी लड़की ने मुँह खोला तो इससे भी बदतर हाल होगा। सितम का सिलसिला यहीं नहीं थमता, सीडब्ल्यूसी सर भी ‘गंदा’ काम करते थे। पुलिस की सुपरविजन रिपोर्ट में बच्चियों की पीड़ा उन्हीं की जुबानी:-

पीड़िता 1 : घटना को सही बताया। वह दो साल से साहू रोड स्थित बालिका गृह में रहती थी। किरण आंटी बतौर हेल्पर के रूप में कार्यरत थी। वह बच्चियों से गलत काम करवाती थी। विरोध करने पर मारा-पीटा करती थी।

पीड़िता 2 : वह कई वर्षों से बालिका गृह में थी।  किरण आंटी गलत काम करती थी और करवाती भी थी। बच्चियों के मना करने पर मारपीट करती थी।

पीड़िता 3 : एक साल से बालिका गृह में थी। खाना मांगने पर चंदा आंटी जो गृह माता थी, गर्म पानी पीठ पर डालती थी। गर्म छोलनी से मारती थी। रात में गलत हरकत करती थी।

पीड़िता 4 : वह कई वर्षों से बालिका गृह में थी। किरण लड़कियों के साथ गंदी हरकत करती थी। रात में सोने के बाद दूसरे कमरे में ले जाती थी।

पीड़िता 5 : वह बालिका गृह में करीब चार वर्षों से थी। दुर्व्यवहार व मारपीट को सही ठहराया।

पीड़िता 6 : पांच साल से बालिका गृह में थी। रात में शौचालय के लिए उठती थी तो किरण आंटी संदेहास्पद स्थिति में मिलती थी। वह बाकी बच्चियों को मारतीं और गाली भी देती थी।

पीड़िता 7 : दो वर्ष से रहती थी। वह वहां सोती थी तो डर लगता था। किरण आंटी कभी बहलाकर तो कभी डरा-धमकाकर ‘गंदा’ काम करती थी। मारपीट भी करती थी। विरोध करने पर हाथ-पैर भी काटे जाते थे।

पीड़िता 8 : किरण आंटी बच्चियों के साथ लगातार झगड़ा करती थी। भूख लगने पर खाना नहीं देकर बच्चियों के साथ गाली-गलौज व मारती थी। इसमें किरण आंटी के साथ अन्य भी शामिल थी।

पीड़िता 9 : 2017 से रहती थी। बालिका गृह में आने के 10-15 दिन बाद सीडब्ल्यूसी के सर उसके साथ गलत काम करते है। काउंसलर शिक्षक विकास सर मंगलवार को बालिका गृह आया करते थे और लड़कियों से  जबरदस्ती करते थे।

पीड़िता 10 : वह सात वर्ष की अवस्था में  बालिका गृह आयी थी। तीन साल से यहां थी। ब्रजेश सर डंडे से बराबर पीटते थे। पीड़िता ने बताया कि इनके साथ वह कभी ‘गंदा’ काम नहीं किया।

बयानों की पेहरसित बहुत बड़ी भी है और साथ में उसमे किया हुआ ज़िक्र बहुत ही घिनौना इसलिए आप ऊपर लिखित दस में 5 लड़कियों के बयान से भी अंदाज़ा लगा सकते है कि किस यातना गृह में वह ज़िंदा रहकर भी रोज़ मारी जाती थी| फिलहाल सीएम नितीश कुमार ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने की सिफारिश करवा दी है और वहीँ विपक्ष मामले को विधानमंडल के दोनों सदनों में उठाकर अपना एजेंडा खेल रहा है लेकिन दिखावे मात्र के लिए भी किसी ने उन बालिकाओं के पास जाकर उनसे भेंट नहीं क्योंकि वे पीड़ित है ? वह भी आपकी बेटी ,बहिन जैसी है इसलिए राजनीति करो थोड़ी इंसानियत के साथ नेता -गण ! सब को मुद्दे की पड़ी है तो वहीँ लड़िकयां अभी भी यातना के दर्द में सड़ी है|

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