स्नातक परीक्षा में चोरी रोकना गुरुजी को पड़ा महँगा

गुरु का अर्थ अज्ञानता के अंधकार को दूर करने वाला होता है। कहते हैं, जो विद्यार्थी अपने गुरु का आशीर्वाद पा लेता है, वह भवसागर के पार उतर जाता है। ऐसे में गुरुओं का सम्मान हर विद्यार्थी अपना दायित्व समझता है।

महाभारत में एकलव्य ने गुरु के सम्मान में अपना अंगूठा काट कर दे दिया था लेकिन जब बात वर्तमान की होगी तो छात्रों के कलियुगी आचरण की भी होगी और अभिभावकों के शिक्षकों के प्रति नजरिया की भी होगी गुरु द्वारा छात्र की पिटाई पर आजकल अभिभावक के शिकायत पर पुलिस खबर लेती है। जब गुरु पीटा जाता है तो अभिभावक छात्रों को बचाने के लिए पहुंच जाते हैं।

मामला MPS साइंस कॉलेज के स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षा का है, जब गुरु चोरी करने से किसी छात्र को रोकते हैं तो वह छात्र शांत हो जाता है। गुरु सोचते हैं विद्यार्थी समझदार हैं, समझाने पर समझ गया और शांत हो गया। लेकिन उनको पता नहीं है यह शांति दिखावटी थी, तूफान के आने के पहले की शांति थी। परीक्षा के चेतावनी की घंटी बजाई गई। गुरु जी ने छात्र से पूछा कॉपी जमा करोगे, छात्र ने कहा औकात में रहो। विश्व का सृजन करता मौन हो गया और झंकृत हो गया गुरु और शिष्य के बीच के अनुशासन की डोर। थोड़ी देर में समय समाप्त हुआ। गुरु का हृदय करुणा से भरा हुआ था। पीड़ा के समुद्र में डूबे होने के बावजूद कॉपी लेने के लिए हाथ बढ़ाया, आखिर ड्यूटी जो निभानी थी। विद्यार्थी ने निर्मलता से हाथ को मरोड़ दिया। फिर भी उन्होंने दूसरे हाथ से कॉपी ले लिया। पीछे से उसके साथी ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए, गाली बकते हुए अंधाधुंध पिटाई शुरू कर दी और कॉपी छीन लिया। गुरु की दारुण स्वर वातावरण में गुंजायमान हो गया। पुलिस वाले आ गए दोनों को पकड़कर छुड़ाया गया।

प्राचार्य शफ़ीक़ अहमद दोनों छात्रों को पकड़कर कार्यालय ले आएं। इन्हें छात्र ना कहें गुंडा कहे तो ज्यादा बेहतर होगा। गुरु का शर्ट, बाँहि और पॉकेट फट चुका था, चेहरा सूज गया था, हाथ में जबरदस्त चोट लगी थी। इधर गुंडे ने भी अपने चेहरे पर मासूम छात्र का चोला पहन लिया। खुद को निर्दोष बताने लगे, पुलिस वालों और गवाह शिक्षकों को झूठ लाने लगे, फोटो खींचते समय चेहरा अपना छुपाने लगे, खुद को फिर से मासूम छात्र बताने लगे। कॉलेज के प्रचार सफीक अहमद ने कहा बहुत गलत हुआ है। शिक्षक का अपमान मेरा अपमान इन छात्रों को कानून के हवाले करो पीड़ित शिक्षक ने कहा छात्र हैं इन्हें इस बार छोड़ दिया जाए। लोगों ने कहा कि इसका मनोबल ना बढ़ाया जाए। मान मनौव्वल का दौर चल रहा था। प्राचार्य का खून खौल रहा था।

हमारे प्रतिनिधि ने छात्रों से पूछा क्यों किया ऐसा तो छात्रों ने कहा कि हमें दिखाकर भविष्य बर्बाद ना करें। शिक्षक ने कहा कि मेरा नाम छापकर और अपमान ना करें। संवाददाता के पास आरोपियों के नाम भी है, प्रवेश पत्र भी है, लेकिन शिक्षक के अनुरोध पर ना तो शिक्षकों का नाम और ना ही छात्र का नाम छाप रहे हैं। लेकिन खबर की तथ्यात्मकता के लिए अपने पाठकों से कुछ तस्वीर साझा कर रहे हैं।

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