यमुनानगर में छात्र ने प्रिंसिपल को गोली मारी,अस्पताल में मौत

Revolver

एक समय शिक्षा के केंद्र रहे देश मे आज गिरती शिक्षा गुणवत्ता का इस से बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है कि शिक्षा के मंदिर माने जाने वाले विद्यालयों में हिंसक घटनाएं देखने को मिल रही है, यहां तक कि इन हिंसात्मक घटनाओं से देवतुल्य शिक्षकगण भी नही बच पा रहे है। इसके लिए कौन दोषी है? व्यवसाय/उधोग का रूप लेता शिक्षा क्षेत्र या पैसे की उगाही का केंद्र बनाता निजी विद्यालयों का ट्रेंड या फिर माता-पिता की सामाजिक दिखावे की मानसिकता। शिक्षा की गिरती गुणवत्ता, शिक्षक-छात्र का बिगड़ता ताल-मेल, पीढ़ी दर पीढ़ी बदलती सोच का प्रभाव क्या सिर्फ इन निजी विद्यालयों पर ही पड़ता है? आज भी पूरे देश मे इस प्रकार की घटनाएं सरकारी विद्यालयों में कम हो रही है, तो क्या यह बेहतर नही होगा कि सरकार सरकारी विद्यालयों की आधरभूत संरचना को सुदृढ करे और उसे उसकी गरिमा, प्रतिष्ठा वापस दिलाये, जिस से की छात्रों ही नहीं बल्कि नागरिकों का भी भरोसा लौट सके।

अभी ताज़ी घटना हरियाणा के यमुनानगर स्थित एक निजी स्कूल की घटना है जहां बारहवीं के एक छात्र ने अपने प्रिंसिपल को गोली मारी। आनन फानन में महिला प्रिंसिपल को हॉस्पिटल ले जाया गया जहां उनकी मृत्यु हो गयी।

बात बस इतनी सी थी कॉमर्स संकाय के बारहवीं के छात्र को कम उपस्थिति व लड़ाई-झगड़े के कारण विद्यालय से पिछले दिन ही बर्खास्त किया गया था। छात्र शनिवार को दोपहर में स्कूल आया और प्रिंसिपल से मिलने की बात कह कर प्रिंसिपल रितु छाबड़ा के चैम्बर में गया और वहाँ जाकर उन्हें 3 गोली मार दी। स्कूल के चपरासी सहित पांच कर्मचारियों ने मिलकर उसे पकड़ा। छात्र ने अपने प्रोपर्टी डीलर पिता के लाइसेंसी रिवॉल्वर से इस घटना को अंजाम दिया।

यमुनानगर के पुलिस अधीक्षक राजेश कालिया ने बताया कि छात्र को हिरासत में ले लीया गया है एवं जांच चल रही है। पुलिस छात्र के पिता पर आर्म्स एक्ट के तहत भी कार्यवाई करेगी। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि डांट व स्कूल से बर्खास्त होने के बाद परेशान छात्र ने ऐसा किया है।

क्या स्कूल प्रबंधन द्वारा डांटने या बर्खास्त करने का यह परिणाम होना चाहिए? विद्यालय में छात्र का शस्त्र लेकर पहुँचना ही इस बात को दिखाता है कि सुरक्षा तंत्र कैसा है? अगर छात्र को स्कूल के गेट पर ही रोक दिया जाता तो प्रिंसिपल की जान नही जाती।

छात्र के पिता जो लाइसेंसी रिवॉल्वर रखते है, ऐसी लापरवाही ठीक नहीं, इस प्रकार के शास्त्र को बच्चों की पहुँच से दूर ही रखना चाहिए, उनकी लापरवाही के कारण ही स्कूल के प्रिंसिपल की जान गई।

किन्तु यमुनानगर की यह घटना एकलौती घटना नही है, इस से पूर्व रयान इंटरनेशनल स्कूल में एक 16 वर्षीय छात्र ने अपनी ही स्कूल के दूसरी कक्षा के छात्र को मार डाला था। लखनऊ में भी इसी प्रकार की एक घटना देख के को मिली थी।

क्या ऐसी ही शिक्षा चाहते है हम अपने बच्चों के लिए? क्या जान लेना सीखते है हमारे बच्चे? क्या समाधान है इस प्रकार की घटनाओं का?

कुछ भी हो ऐसी घटनाएं बंद होनी ही चाहिए, इस प्रकार की घटनाएं हमारे समाज के लिए कलंक है।

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram