बिना आधार न मिले उपचार, आम आदमी सिर्फ बेबस व लाचार

आम आदमी

हरयाणा के सोनीपत में कारगिल शहीद की पत्नी की मौत पर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने ट्वीट में भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि

“हर जगह तथाकथित राष्ट्रवादियों की सरकारें है फिर भी शहीदों के घरवालों के साथ अपमान। ये सिर्फ़ शहीदों के नाम पर वोट की फ़सल काटना चाहते है।”

इस घटना को सभी मीडिया ने प्रमुखता से उठाया तो यह तूल पकड़ने लगा और बात मुख्यमंत्री तक पहुँच गयी, तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस मामले की जांच के आदेश दिया।

ज्ञात हों कि, मृतक शकुंतला कैंसर की मरीज और कारगिल युद्ध में शहीद लक्ष्मण दास की पत्नी थी, जिन्हें गंभीर स्थिति में ट्यूलिप हॉस्पिटल लाया गया था। मरीज के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन के द्वारा ओरिजिनल आधार उपलब्ध करवाने को कहा गया, और उपलब्ध न हो पाने की स्थिति में मरीज को भर्ती नहीं किया गया। मृतक के पुत्र पवन कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा कि आधार की प्रति मोबाइल फ़ोन में दिखाया गया किन्तु अस्पताल प्रबंधन ओरिजिनल प्रति के लिए अड़ी रही। अस्पताल द्वारा भर्ती नही किये जाने पर परिजन मरीज को दूसरे अस्पताल में ले कर पहुँचे तब तक मरीज की मौत ही चुकी थी।

 

बहरहाल, मामले में मृत्यु जिस किसी भी कारण हुआ हो, शर्मनाक है, और सरकार को इस प्रकार की घटना से सिख लेते हुए आगे से सावधानी बरतनी चाहिए। आधार इलाज के लिए अनिवार्य नहीं है बल्कि दस्तावेज-प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है। आधार की प्रति होनी चाहिए, आधार नंबर भी तत्काल उपलब्ध हो जाये तो वह भी पर्याप्त है, मरीज के उपचार में किसी भी प्रकार का विलंब न हो, यह सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए। हाल की कुछ घटनाओं में अस्पतालों द्वारा लापरवाही इस बात को साबित करती है की इंसानी जीवन से ज्यादा कीमती उनका अपना पेशा और लाभ बनाना है।

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हमारी तो सलाह यही है कि आप सभी अपना आधार शीघ्र ही बनवा ले और साथ ही उसकी ओरिजिनल प्रति अपने साथ हमेशा रखे ताकि इस प्रकार की किसी भी अनचाही घटना से बच सके।

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