यात्रियों के जान हैं खतरे में, अमरनाथ यात्रा पर हैं आतंकवादियों का साया

अमरनाथ यात्रा से पहले मिली जानकारी से यह पता चल रहा है कि, आतंकी अमरनाथ यात्रा पर हमला कर सकते हैं। इसके चलते आतंकियों की किसी भी चाल का जवाब देने के लिए श्रीनगर में NSG के ब्लैक कैट कमांडो तैनात किए गए हैं। एक लंबे विचार विमर्श के बाद बीते महीने गृह मंत्रालय ने NSG की तैनाती पर मुहर लगाया था। फिलहाल NSG BSF के साथ मिलकर हुमहमा कैंप पर कड़ी ट्रेनिंग कर रही है। जिसके बाद NSG को यहां जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधीन रखा जाएगा। क्योंकि जम्मू-कश्मीर पुलिस ही सभी आतंकविरोधी अभियानों की नोडल एजेंसी होती है। साथ ही एयरपोर्ट की सुरक्षा भी इन्ही के हाथों सौपी गयी हैं। बता दें, फिलहाल कश्‍मीर में ऑपरेशन ऑल आउट जारी है और अमरनाथ यात्रा 29 जून से शुरू हो रही हैं। इसी के चलते ऐसी आशंकाए है की, आतंकी अमरनाथ यात्रा को निशाना बना सकते हैं।

आपको बता दें की, पिछले साल 204 कंपनियां सुरक्षा बलों की थी उन्हें 2018 में बढ़ाकर 238 कंपनियां कर दिया गया है। RFID कार्ड वाहनों में लगाना सक्त कर दिया है, जिससे वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही अमरनाथ यात्रा के संवेदनशील जगहों पर ड्रोन कैमरों से नजर रखी जाएगी। आपको बता दें की, घाटी में इस समय कुल करीब 205 आतंकी मौजूद होने की आशंकाए हैं। जिसमें 102 हिजबुल मुजाहिद्दीन के लोकल आतंकी के साथ-साथ 47 लश्कर और 11 जैश के लोकल आतंकी मौजूद हैं। साथ ही जम्मू- कश्मीर में घुसपैठ की तैयारी में 450 आतंकी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को उम्मीद है कि, NSG की तैनाती से कश्मीर और घाटी में आतंकी घटनाओं पर लगाम लगेगा।

यह कोई पहली बार नहीं है, जब ब्लैक कैट के नाम से पहचाने जाने वाले NSG कमांडो जम्मू कश्मीर में तैनात किये जाएंगे। इस बल के कमांडो पूर्व में भी घाटी में तैनात हो चुके हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2017 में सुरक्षाबल के 82 लोग मारे गए थे और इस साल अब तक करीब 34 लोग मारे गए हैं। वहीं, आम लोगों की बात करें तो 2017 में 68 लोग मारे गए थे और इस साल अभी तक 38 लोग मारे गए हैं। साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2015 से लेकर 17 जून, 2018 तक आतंकवाद से राज्य में कुल 954 मौतें हुईं। इसमें 249 सुरक्षाबल के जवान और 129 आम लोग थे।ब्लैक कैट कमांडो की गिनती देश के सबसे खतरनाक कमांडोज में होती है। NSG को 16 अक्टूबर 1984 में बनाया गया था ताकि देश में होने वाली आतंकी गतिविधियों से निपटा जा सके। NSG का एक कमांडो आतंकवादियों के पूरे एक गैंग पर भारी पड़ता है। एनएसजी कमांडो एमपी 5 सब मशीन गन, स्नाइपर राइफल, दीवार पार देखने की क्षमता वाला रेडार और सी-4 एक्सप्लोसिव का इस्तेमाल करते हैं। आपको बता दें कि 1984 में अमृतसर स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकियों को खत्म करने के लिए चलाए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद एनएसजी का गठन किया गया था। ब्लैक कैट कमांडो को इससे पहले मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमलों से जनवरी 2016 में पठानकोट वायु सेना शिविर पर हुए आतंकी हमले से और गुजरात के अक्षरधाम मंदिर में हुए आतंकी हमले से निपटने के लिए तैनात किया गया था।

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