J & K में सरकार गिरने के बाद, किसने क्या कहा ? अब आगे क्या हो सकता है?

भारतीय जनता पार्टी ने पीडीपी से अलग होते ही और सरकार से समर्थन वापस लेते ही जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। अब सबकी नजरों में एक ही सवाल है की, अब आगे क्या क्या हो सकता है? क्या सियासी दलों के साथ जोड़-तोड़ कर अब जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की फिर से किसी तरह की कवायद शुरू होगी? राष्ट्रपति शासन लागू होगा? या फिर दोबारा कुछ समय बाद चुनाव कराए जाएंगे? अगर विकल्पों की बात करें, तो सबसे अधिक कयास इसी बात पर लगाए जा रहे हैं कि, राज्य में अब राष्ट्रपति शासन लगना लगभग तय है, क्योंकि भारतीय जतना पार्टी ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है। हालांकि, राष्ट्रपति शासन अगर लागू होता है, तो सवाल यह खड़ा होता है कि, क्या चुनाव इसी साल के अंत में कराए जाएंगे या फिर 2019 लोकसभा चुनाव के साथ?

अगर मगर की राजनीति की बात करे तो, अगर कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन पीडीपी के साथ आए और सरकार बना ले ,तो पीडीपी की सरकार बच सकती है। लेकिन फिलहाल तो कांग्रेस ने पीडीपी को समर्थन देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, राजनीति में कुछ भी हो सकता है, इसलिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन से वहां बीजेपी गठबंधन की सरकार बना सकती है, मगर ऐसी स्थिति में सीएम पद की मांग उमर अब्दुल्ला जरूर करेंगे।

जम्मू और कश्मीर में सरकार के गिरते ही अन्य पार्टी के नेताओं ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए बीजेपी और पीडीपी पर निशाना साधा है। शिवसेना ने कहा की,

“यह गठबंधन राष्ट्रविरोधी और अप्राकृतिक था। हमारी पार्टी के अध्यक्ष ने कहा था कि, यह गठबंधन नहीं चलेगा। अगर बीजेपी इसे चालू रखती तो 2019 में उनको जवाब देना पड़ता।”

कोंग्रेस के गुलाम नबी आजाद ने कहा की,

“जो कुछ भी हुआ अच्छा हुआ। जम्मू-कश्मीर की जनता को अब थोड़ी राहत मिलेगी। बीजेपी ने कश्मीर को बर्बाद कर दिया है। बीजेपी स्वर्ग को खंडर बना कर छोड़ दे रही है। सरकार की वजह से कई सैनिक और नागरिक बीते 3 सालों में मारे गए हैं। पीडीपी के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने का कोई सवाल ही नहीं है।”

दिल्ली में अनशन पर बैठे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर कहा की,

“बर्बाद करने के बाद, भाजपा कश्मीर से बाहर हो गई।”

इसी बीच नेशनल कॉन्‍फ्रेंस के कार्यकारी अध्‍यक्ष उमर अब्‍दुल्‍ला श्रीनगर में जम्‍मू-कश्‍मीर के राज्‍यपाल एनएन वोहरा से मिले। पार्टी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन में कहा,

”नेशनल कांफ्रेंस को 2014 में सरकार बनाने का जनादेश नहीं मिला था, आज भी सरकार बनाने का जनादेश नहीं है। इसलिए ना ही हम सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ना ही करेंगे। हम चाहेंगे राज्य में नए सिरे से जल्द से जल्द चुनाव हो।”

पूर्व मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन में अपना कहना रखा, उन्होंने कहा, आपस में कुछ दिक्कतें थीं, दोनों पार्टियों को एकसाथ काम करने के लिए माहौल बनाने में काफी समय लगा, लेकिन बीजेपी का आज का फ़ैसला बिल्कुल अप्रत्याशित है। ”हमने ये सोचकर बीजेपी के साथ गठबंधन किया था कि, बीजेपी एक बड़ी पार्टी है, जिसकी केंद्र में सरकार है। पीएम मोदी जी को देश भर में भारी समर्थन मिला था, ऐसे में यह जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए भी फायदेमंद हो सकता था। हम इसके ज़रिए जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ संवाद और पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध चाहते थे। अपने पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ”मुफ्ती साहब ने जिस मकसद के लिए ये गठबंधन किया था, उसके लिए हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। अब हम कोई और गठबंधन नहीं तलाशना चाहते।” उन्होंने कहा, ‘एक बात तो साफ है कि, जम्मू-कश्मीर में सख्ती की नीति नहीं चल सकती है। यह समझना होगा कि, जम्मू-कश्मीर दुश्मनों का क्षेत्र नहीं है। हमारी सरकारी ने सीजफायर रुकवाया, पीएम का पाकिस्तान जाना, धारा 370 के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देना, पत्थरबाजी के आरोप वाले 11 हजार युवाओं के केस वापस कराए गए। हमने सत्ता के लिए सरकार नहीं बनाई थी। हमने अपना अजेंडा को पूरा किया है।

जम्मू कश्मीर विधानसभा में कुल 87 सीटें हैं। मौजूदा विधानसभा में महबूबा मुफ़्ती की पीडीपी के कुल 28 विधायक हैं। वहीं बीजेपी 25 सीटों के साथ दूसरे पायदान पर है। उमर अब्दुल्लाह की नेशनल कांफ्रेंस 15 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि कांग्रेस 12 सीटों के साथ चौथे स्थान पर है। अगर जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल शासन लगता है और राज्यपाल शासन लगने के 6 महीने के भीतर अगर राज्य में संवैधानिक तंत्र दोबारा बहाल नहीं हो पाता है, तो भारत के संविधान की धारा 356 के तहत जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन के समय को बढ़ा दिया जाता है और यह राष्ट्रपति शासन में तब्दील हो जाता है। अब तक जम्मू-कश्मीर में 7 बार राज्यपाल शासन लगाया जा चुका है।

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