कर्नाटक की जनता को लुभाने का बीजेपी-कांग्रेस के पास था आखिरी मौका, थम गया चुनाव प्रचार, अब सारा ध्यान नतीजों के तरफ

दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में विधानसभा चुनाव का प्रचार थम गया। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अपनी जीत के लिए जोर लगाने का बीजेपी और कांग्रेस के पास कल आखिरी मौका था। इसके बाद 12 मई को वोटिंग होगी और 15 मई को नतीजे आएंगे। बता दें कि कर्नाटक में विधानसभआ की 224 सीटों में से 223 सीटों पर 12 मई को चुनाव होंगे। 

कर्नाटक दक्षिण का इकलौता राज्य है जहां 2008 मे भाजपा ने सत्ता हासिल की थी। इस पांच साल की सत्ता के दौरान यहां तीन मुख्यमंत्री येदियुरप्पा, जगदीश शेट्टार और डी सदानंद गौड़ा रहे चुके हैं। 2013 में यहाँ भाजपा के हाथ से सत्ता निकल गयी और कांग्रेस को 120 सीटें हासिल हुई, जिसके चलते कोंग्रेस अकेले सरकार बनाने में कामयाबी रही थी। अब इस साल कांग्रेस के लिए, कर्नाटक में अपनी सत्ता बरकरार रखना बहुत जरूरी होगा, दूसरी तरफ 2019 से पहले दक्षिण भारत में अपनी पकड़ बनाने के लिए भाजपा के लिए भी यह चुनाव जीतना बहुत जरूरी होगा। माना जाता है कि येदियुरप्पा की लिंगायत समुदाय में अच्छी पकड़ है। ऐसे में साफ है कि चुनाव में दोनों पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला होने जा रहा है। एक तरह से कर्नाटक के चुनाव पर बहुत कुछ दांव पर है। भाजपा के लिए और उससे कहीं अधिक कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए। इसके लिए सोनिया गांधी भी चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। अभी तक के सर्वे के मुताबिक सत्तारूढ़ कांग्रेस बीजेपी को कड़ी टक्कर देते दिखाई दे रही है। बीते कुछ दिनों में दोनों पार्टियों ने मिलके जमकर चुनावी रैली और सभाओं का आयोजन किया था और दोनों पार्टियों के स्टार प्रचारकों ने इन्हें संबोधित किया था, साथ ही चुनाव प्रचार के आखिरी दिन(कल) रोड शो के साथ-साथ दोनों पार्टियों ने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी आयोजन किया था।

कर्नाटक में चुनाव के बिगुल बजते ही कांग्रेस सरकार ने लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देकर बड़ा दांव खेला। उन्होंने कहा कि, कांग्रेस ने इस समुदाय को ध्यान में रखकर, उनकी भावनाओं को समझकर, इस समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने की सिफारिश की और कई लोगों को कांग्रेस की यह सिफारिश भाजपा के वोट विभाजित करने की कोशिश लग रही है। कर्नाटक में चुनावी सभा को संबोधित करने के दौरान राहुल ने कहा कि, पीएम मोदी और बीजेपी ने गब्बर सिंह की पूरी टीम कर्नाटक चुनाव में झोकी दी। राहुल ने कहा कि, मोदी जी कर्नाटक में आते हैं तो उनके पास कुछ बोलने को नहीं होता। इसलिए वह सिर्फ मेरे ऊपर हमले बोलते हैं और मेरे बारे में बोलते रहते हैं, साथ ही कहा कि, मोदी जी ने जैसे कोंग्रेस मुक्त अभियान चलाया हैं, वैसे मैं ‘भाजपा मुक्त भारत’ नहीं चाहता मैं उनसे लड़ूंगा, उन्हें पराजित करूंगा।’ देश में हाल ही में हुए बलात्कार कि घटनाओं का संदर्भ लेते हुए गांधी ने कहा, पीएम मोदी का नारा बदल गया है, अब नया नारा है ‘बेटी बचाओ बीजेपी के एमएलए से’ ऐसा हैं। प्रचार के अंतिम दिन राहुल बेंगलुरू में प्रेस कॉन्फेंस कर के कहा कि, पीएम ने कर्नाटक के लिए कुछ भी नहीं किया। वह भ्रष्टाचार की बात करते हैं, जबकि येदियुरप्पा भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जा चुके हैं। रेड्डी बंधुओं ने यहां के लोगों का खूब पैसा लूटा है। इस तरह कोंग्रेस ने स्थानीय मुद्दों को उठाकर भाजपा पर हमला बोला।

इन सभी बातों और बयानों का अपनी भाषणों में जिक्र करते हुए और समाचार लेते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी कोंग्रेस की राजनीति और राजकरण करने के तरीके पर कड़ा अटैक किया। पीएम मोदी ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा की, अचानक एक आदमी आया और उसने खुद को प्रधानमंत्री पद का दोवदार घोषित कर दिया। उसने कतार में खड़े सीनियर नेताओं को नजरअंदाज कर अपनी बाल्टी आगे कर दी और कहा में प्रधानमंत्री बन जाऊंगा। ये बर्ताव बताता है कि उनके अंदर कितना अहंकार है, साथ ही उन्होंने कोंग्रेस पार्टी पर निशान साधा और कहा कि, कांग्रेस यह मानकर चलती है कि, देश की जनता ने उन्हें करप्शन करने का, बेईमानी, भाई-भतीजावाद, सारे बुरे काम करने का ठेका दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि, कांग्रेस 6 बीमारियों से ग्रस्त है, कांग्रेस कल्चर, कम्युनलिजम, कास्टिजम, क्राइम, करप्शन, कॉन्ट्रैक्ट। पीएम ने कहा कि, राहुल गांधी उच्चवर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि वह खुद आम लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय के लोगों का दिल जीतने की कोशिश में मोदी ने 12 वीं सदी के समाज सुधारक बसवेश्वर का बार बार जिक्र किया। भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी एस येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय से ही आते हैं।

कर्नाटक में भाजपा सरकार आने की आशंकाओं को देखा जाए तो, मोदी लहर अभी भी बरकरार हैं, कम से कम शिक्षित वर्ग और बंगलूरू जैसे मेट्रो शहर में, साथ ही भाजपा सरकार के दौरान ज्यादा सांप्रदायिक घटनाएं न होना और कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर होना भी भाजपा को फायदा दे सकती है, लेकिन भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार येदियुरप्पा का भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाना, रेड्डी भाइयों और रिश्तेदारों को आठ टिकट देना, येदियुरप्पा के साथ मंच साझा करना, अनंत कुमार हेगड़े जैसे नेताओं का आए दिन बेतुके बयान देना, कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार के खिलाफ कोई महत्वपूर्ण घोटाला या भ्रष्टाचार सामने न ला पाना इन सब बातों से यहाँ पर भाजपा का विजय रथ आसानी से आगे बढ़ना जरा मुश्किल लग रहा हैं। अब देखना यह है कि, कर्नाटक की जनता अपना समर्थन कोंग्रेस को देती है या फिर की बीजेपी की ओर से येदियुरप्पा को सत्ता में आने का मौका देती है।

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