कर्नाटक में शुरू हो गया रूठने का सिलसिला, एसआर पाटिल ने कार्यकारी अध्‍यक्ष पद से दिया इस्‍तीफा

कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल सेक्‍युलर की सरकार बनने के कुछ दिनों बाद अब अपनों के रूठने का सिलसिला शुरू हो गया है। कांग्रेस के नॉर्थ कर्नाटक के कार्यकारी अध्‍यक्ष एसआर पाटिल ने हार की नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए पद से इस्‍तीफा दे दिया है। हालांकि पाटिल के इस्‍तीफे से विपक्ष में बैठी बीजेपी को भी कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। कर्नाटक बीजेपी ने इस पर ट्वीट कर कहा कि, ‘जनादेश का मजाक उड़ाकर बनाई गई सरकार का पतन शुरू हो गया है।’

उत्तर कर्नाटक में पार्टी के अपेक्षाकृत खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए एस आर पाटिल ने प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष पद छोड़ दिया है। एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व में सत्ता संभालने के दो दिन बाद ही पाटिल ने २५ मई को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को ई-मेल से इस्तीफा भेजा था लेकिन इसकी जानकारी रविवार को ही सामने आई। हालांकि, पार्टी ने अभी पाटिल का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। पाटिल के पास उत्तर कर्नाटक की जिम्मेदारी थी। विधान परिषद सदस्य पाटिल पिछली सिद्धरामय्या सरकार में आईटी-बीटी मंत्री भी रह चुके हैं। दोनों को एक साथ ही सरकार से हटाकर संगठन की जिम्मेदारी दी गई थी। पाटिल ने कहा कि, उनके पास उत्तर कर्नाटक की जिम्मेदारी थी, लेकिन इस क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है और इसी कारण मैंने इस्तीफा दिया है। पाटिल ने यह भी बताया कि, वो कोई भी मंत्री पद नहीं चाहते हैं। पाटिल ने कहा कि, वे बिना पद के भी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। पाटील ने कहा, उत्तरी कर्नाटक में मैं पार्टी के प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार था। अगर पार्टी ने इस क्षेत्र में ज्यादा सीटें जीती होती तो हम स्वतंत्र रूप से सरकार बनाते।

कर्नाटक की राजनीति में चर्चा है कि, पाटिल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जी. परमेश्वर, कांग्रेस प्रभारी के.सी. वेणुगोपाल द्वारा पार्टी मामलों में निरंतर उपेक्षा करने से नाराज होकर पद छोडऩे का निर्णय किया है। दोनों नेताओं के रवैये के कारण ही पाटिल ने पद छोडऩे का फैसला किया।पाटिल ने ही बादामी में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के प्रचार अभियान की कमान संभाली थी। लेकिन कम मतों से जीत को लेकर सिद्धरामय्या पाटिल से इन दिनों नाराज बताए जाते हैं। हालांकि, पाटिल कभी सिद्धरामय्या के काफी करीबी और विश्वास पात्र नेताओं में हुआ करते थे।

राज्य विधानसभा के लिए 12 मई को हुए चुनाव में कांग्रेस को 222 सीटों वाली विधानसभा में 78 सीटों पर जीत मिली थी। जेडीएस नेता एचडी कुमारस्‍वामी ने सीएम पद की शपथ ली है। दोनों पार्टियों ने गठबंधन की सरकार को सही तरीके से चलाने के लिए एक फॉर्म्युला तय किया है। इसके तहत कर्नाटक में मंत्रालयों का बंटवारा हुआ है जिसमें कांग्रेस को 22 मंत्रालय जबकि जेडीएस को 12 मंत्रालय मिले हैं। कांग्रेस के पास गृह, राजस्व, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहेंगे। जेडीएस के पास वित्त, पर्यटन, पीडबल्यूडी, शिक्षा और ट्रांसपॉर्ट विभाग रहेंगे। मीडिया में ऐसी भी खबरें हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया कोशिश कर रहे हैं कि जी परमेश्वर के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें (पाटिल) कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए।

मल्लिकार्जुन खरगे से इस बारे मेें पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि, उन्हें केवल यही पता है कि, पाटिल ने अपना त्यागपत्र कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पास भेजा है। पाटिल कांग्रेस के अत्यंत वरिष्ठ व निष्ठावान नेता हैं। उनको यदि किसी तरह की नाराजगी है, तो चर्चा करके उनकी नाराजगी को दूर किया जाएगा।

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