लिंगायत मुद्दे पर बोले शाह- बीजेपी का रुख साफ, कांग्रेस कर रही हैं राजनीति,लिंगायत समाज अलग धर्म नहीं।

 

कांग्रेस सिद्धारमैया सरकार ने १९मार्च को वीरशैव-लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने का सुझाव मंजूर किया था।यह मंजूरी नागभूषण कमेटी के सुझाव और राज्य अल्पसंख्यक कानून की धारा २डी के तहत दी गई। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। ‎कर्नाटक सरकार द्वारा लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा दिए जाने वाले प्रस्ताव को मंजूरी देने के फैसले पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा,कि लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने की राज्य सरकार की सिफारिश को केंद्र सरकार नहीं मानेगी। जैसे कि लिंगायत समुदाय के सभी महंतों का यह कहना है, कि समुदाय को बाँटने नहीं देना है,मैं इस बात का भरोसा देता हूँ,की जब तक भाजपा की सरकार है किसी भी तरह का बँटवारा नहीं होगा। ये कांग्रेस का दोहरा चरित्र है,वे लिंगायत वोटों का धुव्रीकरण चाहते हैं। भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस पर आरोप लगाया,कि सिर्फ वोट बैंक के लिए कांग्रेस पार्टी लिंगायत समुदाय का इस्तेमाल कर रही है। लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने का सुझाव ये सिद्धारमैया सरकार की येदियुरप्पा जी को कर्नाटक का सी एम बनने से रोकने की रणनीति है। यूपीए जब सरकार में थी,तो उसने इसी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। लेकिन आज इस मुद्दे पर कांग्रेस राजनीति कर रही है। हम लोग पूरे देश के बारे में सोचते है। कर्नाटक की जनता को पता है,ये सब किस लिए किया जा रहा हैं और समुदाय इसे लेकर जागरुक है। चुनाव के बाद भाजपा अपना रुख स्पष्ट करेगी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को अपने कर्नाटक दौरे के दौरान यह बातें कही।

अमित शाह ने कहा,कि कांग्रेस ने ग़रीबों के विकास के लिए कुछ भी नहीं किया हैं लेकिन,भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ओबीसी का ध्यान रखते हुए कई नई योजनाएं बनाई है। ये बात अलग है,कि कर्नाटक में भाजपा की सरकार नहीं होने के कारण अभी तक केंद्र सरकार की कुछ योजनाएं आप तक नहीं पहुंच पाई हैं, लेकिन अब जब कर्नाटक में भाजपा की सरकार आएगी,तो यहां के समुदाय भी केंद्र की योजनाओं का फायदा उठा पाएंगे। अमित शाह ने कर्नाटक की मौजूदा सिद्धारमैया सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, कि उनकी सरकार सिर्फ भ्रष्टाचार, गुंडागर्दी और हिंदुओं को मारने के लिए जानी जाती है। शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा,कि अब ग़रीबों की स्थिति सुधरेगी भी और विकास भी होगा।

येदियुरप्पा,भाजपा के पूर्व सी एम थे वो खुद भी लिंगायत समुदाय से आते हैं। लेकिन ये कहना सही नहीं हैं,कि वो लिंगायत समुदाय से आते हैं और भाजपा उस समुदाय को खुश करना चाहती है। वो हमारी पार्टी का मुख्य चेहरा हैं। भाजपा ने येदियुरप्पा को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया,तो कांग्रेस को लिंगायत समुदाय की याद आने लगी। भाजपा किसी नफे नुकसान के आधार पर नहीं चलती है,पार्टी के लिए सिद्धांत महत्वपूर्ण है। पार्टी अपने पहले स्टैंड पर आज भी कायम हैं।

कर्नाटक की राजनीति में लिंगायत समुदाय की करीब १७फीसदी आबादी है। यह समुदाय करीब १००सीटों के नतीजों को प्रभावित करता है। २२४ सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस को शानदार विजय मिली जबकि भाजपा महज ४०सीटों पर सिमट गई। समय बदलने के साथ येदियुरप्पा ने भाजपा का दामन थामा और भाजपा ने उन्हें सी एम पद के लिए उम्मीदवार भी घोषित कर दिया। लिंगायत समुदाय से आने वाले येदियुरप्पा के सी एम पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद कांग्रेस पार्टी में खलबली मच गई और कांग्रेस ने लिंगायत कार्ड खेल दिया। कांग्रेस प्रत्याशी व वर्तमान सी एम एस.सिद्धारमैया भी लिंगायत समुदाय से आते हैं और इस बार चुनाव में इन्हीं दोनों के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। अगर कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस के पास बड़े राज्यों में फिलहाल कर्नाटक ही बचा है और इसे पाने के लिए कांग्रेस ने पूरी जान डाल दी है। तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी का ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का सपना अभी भी कर्नाटक जीतने के बाद ही पूरा होगा, तभी तो सत्ता पाने के लोभ में शाह लिंगायत समुदाय को अपने पाले में रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं और कांग्रेस पार्टी भी।

निर्णायक भूमिका:
अब देखना होगा,कि इस बार लिंगायत समुदाय किसे अपना समर्थन देती हैं। लिंगायत समुदाय को कर्नाटक की अगड़ी जाति में गिना जाता है। लिंगायत न सिर्फ कर्नाटक में बल्कि महाराष्ट्र,तेलंगाना,आंध्र प्रदेश,तमिलनाडु और केरल में भी काफी संख्या में रहते हैं।

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram