कांग्रेस ने चुनाव आयोग से की शिकायत, सबूतों के साथ मध्य प्रदेश की वोटर लिस्ट में किया ‌फर्जीवाडे का दावा

मध्य प्रदेश में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मध्यप्रदेश में कम से कम 60 लाख फर्जी वोटर शामिल किये जाने का दावा करते हुए कांग्रेस ने शिवराज सरकार के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत की है। इसके साथ ही कांग्रेस ने शिवराज सरकार को चुनाव आयोग ‌के कठघरे में खड़ा किया है। साथ ही कांग्रेस चुनाव आयोग से गडबडी करने वाले सभी रिटर्निंग आफिसर्स के खिलाफ सख्ते कार्रवाई की भी मांग की है। चुनाव आयोग ने इन शिकायतों की जांच करने का कांग्रेस को भरोसा दिया है।

वरिष्ठ पार्टी नेता मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ की अगुआई में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला। कुछ लिखित तो कुछ लैपटॉप प्रेजेंटेशन के माध्यम से कमलनाथ ने आयोग को विस्तार से प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत का असर हुआ और शाम होते-होते केंद्रीय चुनाव आयोग ने वरिष्ठ अधिकारियों की 4 टीम बनाकर जांच की जिम्मेदारी दे दी। विधानसभा नरेला, भोजपुर, होशंगाबाद और सिवनी की चार क्षेत्रों की वोटर्स-लिस्ट खंगालने की जिम्मेदारी जांच दल को दी।  सोमवार को जांच टीम अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंचकर जांच शुरू कर देगी। आयोग से शिकायत करने के बाद कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर वोटर लिस्ट में फर्जीवाडे का गंभीर आरोप लगाया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वोटर लिस्ट में हेर-फेर का ब्यौरा देते हुए कहा कि, कई वोटरों के नाम एक ही पोलिंग बूथ पर चार-पांच जगह हैं। इसी तरह कई ऐसे मामले हैं जिसमें उसी व्यक्ति का नाम दूसरे पोलिंग बूथ पर भी एक से अधिक संख्या में अलग-अलग नामों से है, जबकि फोटो और पिता का नाम एक ही है। ऐसे मामले भी काफी हैं जिनमे एक ही वोटर का नाम आस-पास की दो विधानसभा की वोटर लिस्ट में है। एक ही व्यक्ति का दो से पांच बार सूची में अलग-अलग नाम दर्ज है। जबकि कुछ मामलों में तो दो दर्जन बार। एक महिला का नाम कहीं पुरुष तो कहीं महिला के रुप में 26 जगह शामिल किये जाने का उन्होंने दस्तावेज भी दिखाया। राज्य की आबादी 24 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन मतदाताओं की संख्या में 40 प्रतिशत इजाफा हुआ है। उन्होंने इस आंकड़े को हैरान करने वाला बताया है। सिंधिया ने कहा कि, यह सीधे सीधे प्रजातंत्र के हृदय में छुरी भोंकने जैसा है। उन्होंने कहा कि, फर्जी वोटरों के मामले की जांच कर सत्ताधारी पक्ष से मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर सेक्श्न 32 के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मध्यप्रदेश में 5 करोड वोटर हैं और 60 लाख फर्जी वोटर का अर्थ है कि, 12 प्रतिशत फर्जी मतदाता हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच 9 % मत का अंतर था। सिंधिया ने कहा कि, इससे साफ है कि, फर्जी मतों के जरिये चुनाव में हेर फेर की शिवराज सरकार की पूरी तैयारी है। सिंधिया ने कहा कि, लोकतंत्र की बुनियाद के खिलाफ काम करने वाले अधिकारियों को 10 साल तक चुनावी डयूटी से हटाने का दंड भी दिया जाना चाहिए।

फर्जी वोटर लिस्ट का मामला कांग्रेस पार्टी मप्र के उपचुनावों के समय से उठाती रही है, मगर चार महीने बाद होने वाली विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ नेताओं ने इसकी शिकायत सीधे केंद्रीय चुनाव आयोग से की।7 जून को कमेटी को जांच की रिपोर्ट आयोग को देनी होगी। रविवार को आमतौर पर एआईसीसी में कामकाज बंद रहता है।

‎भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेसी नेताओं के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि, ये सारी झूठी स्क्रिप्ट दिग्विजय सिंह की लिखी हुई है। उन्होंने जो लिख दिया उसे कमलनाथ आगे बढ़ा रहे हैं। प्रदेश की जनता समझदार है। सब समझ रही है।

‎ये करेंगे जांच

1. नरेला: वीएन शुक्ला, निदेशक आईटी ओर सुमित मुखर्जी प्रधान सचिव

2. ‎भोजपुर: अनुज जयपुरियार, प्रधान सचिव, विजय कुमार, 3. आईटी होशंगाबाद: केएन भार, प्रधान सचिव, सोनल खरबंदा,

4. ‎आईटी सिवनी- मालवा: बीसी पात्रा, सचिव, अंकित सिंह

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार का कार्यकाल जनवरी 2019 में खत्म हो रहा है और इससे पहले यहां चुनाव होने हैं। राज्य में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं। भाजपा के सबसे मजबूत माने जाने वाले इस राज्य में शिवराज अपने चौथे कार्यकाल के लिए चुनावी मैदान में होंगे।

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