मुंबई के पूर्व ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर ‘दबंग’ ऑफिसर हिमांशु रॉय के आत्महत्या कि सच्चाई

मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हिमांशु रॉय ने मुंबई स्थित अपने घर में शुक्रवार दोपहर 1 बजकर 40 मिनट पर अपनी सर्विस रिवॉल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने कई हाई प्रोफाइल मामलों की जांच में अहम भूमिका निभाई थी। साल 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हिमांशु रॉय लंबे वक्त से कैंसर से पीड़ित थे और साल 2016 से वे मेडिकल लीव पर थे, फिलहाल वे मुंबई पुलिस में एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एडीजी) थे और वे महाराष्ट्र के एंटी-टेरर स्क्वायड (एटीएस) के प्रमुख भी रह चुके थे। अपने कड़क रुख के लिए पहचाने जाने वाले हिमांशु रॉय की आत्महत्या के पीछे की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है, लेकिन बताया जा रहा है कि लंबे समय से बीमारी के चलते वे डिप्रेशन के शिकार हो गए थे, हालांकि रॉय काफी समय से ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। उनकी नियमित रूप से कीमोथैरेपी और रेडियशन थैरेपी भी चल रही थी। हिमांशु रॉय 2016 से ही छुट्टी पर चल रहे थे। हिमांशु रॉय को गोली लगने के बाद परिजन उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का काफी प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक रॉय ने अपने मुंह पर रिवॉल्वर रखकर गोली मारी थी, जिसके चलते उन्हें बचाना बेहद मुश्किल हो गया था।रॉय की पहली पोस्टिंग 1991 मे मालेगांव में हुई। वहां उन्होंने बाबरी मस्जिद मामले में भड़के दंगों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई। साल 2009 में उन्हें मुंबई का ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर बनाया गया। एटीएस चीफ बनाए जाने के बाद उन्हें मुंबई में पहली साइबर क्राइम सेल स्थापित करने का श्रेय मिला। उनकी महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में डकैत विरोधी योजनाएं और वूमेन सेल आज भी मॉडल के रूप में महाराष्ट्र में देखी जा सकती हैं। क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर के तौर पर रॉय ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) स्पॉट फिक्सिंग की जांच के दौरान साल 2013 में बॉलीवुड अभिनेता विंदु दारासिंह को गिरफ्तार किया था, पत्रकार जेडे हत्याकांड, बॉलीवुड अभिनेत्री लैला खान के दोहरे हत्याकांड और लॉ ग्रेजुएट पल्लवी पुरकायस्था हत्याकांड, शक्ति मिल रेप, गोरगांव की हीरे चोरी जैसे अहम मामले को सुलझाया था। मुंबई हमलों की रेकी करने वाले लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी डेविड हैडली से पूछताछ व जांच करने वाली टीम में भी वे रहे। मुंबई हमलों के दौरान पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब को फांसी रॉय के ही मुंबई क्राइम ब्रांच के चीफ रहते हुए दी गई थी। उन्होंने एटीएस चीफ रहते हुए ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनीस अंसारी को गिरफ्तार कर बांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स में बने अमेरिकन स्कूल को बम से उड़ाने की योजना असफल की। इंडियन मुजाहिद्दीन के चीफ यासीन भटकल के मुंबई और पुणे ब्लास्ट मामले की जांच 2013 में हिमांशु रॉय को सौंपी गई थी। उसके बाद से ही उनकी जान पर खतरा था। उनका नाम दाऊद इब्राहिम मामले से लेकर कई बड़े नामचीन केस से जुड़ा था। दाऊद के ग्रुप डी कंपनी को मुंबई से तोड़ने का काम उन्होंने ही किया था, जिसकी वजह से वह अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद के निशाने पर थे।यही वजह से थी कि उन्हें Z+ सिक्योरिटी दी गई थी।उनकी फिट बॉडी, दबंग पर्सनेलिटी को देखने के बाद, जिस तरह से उन्‍होंने अपनी जीवयात्रा समाप्‍त कि, उससे हर किसी के जहन में एक सवाल उठा हैं कि, उन्‍होंने ऐसा क्‍यों किया। एक ऐसा इंसान जो दूसरों के लिए प्रेरणा हो, वो ऐसा कैसे कर सकता है। इन सबके बीच अब फिरसे कई सवाल पुलिस के दिमागी सेहत और स्वास्थ्य को लेकर उठे हैं, जिसपर आने वाले दिनों में काफी कुछ चर्चा और बातचीत होगी।

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